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Balotra: चार भाइयों की एक साथ उठी थी अर्थी, मंत्री जोगाराम पटेल ने पिता को बंधाया ढांढस, सहायता का दिलाया भरोसा

Balotra Road Accident: बालोतरा जिले के कोडुका गांव में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले चार भाइयों के परिवार से मिलने पहुंचे मंत्री जोगाराम पटेल ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने परिजनों को सांत्वना देते हुए इस घटना को परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

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Balotra Accident

परिजनों से मिलते मंत्री जोगाराम पटेल। फोटो- पत्रिका

बालोतरा। संसदीय कार्य, विधि एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल शुक्रवार को बालोतरा जिले के कोडुका गांव पहुंचे और 16 जून को हुए भीषण सड़क हादसे में दिवंगत हुए चार भाईयों रेखाराम, उदाराम, विशनाराम और जोगाराम को श्रद्धांजलि अर्पित की। मंत्री पटेल ने शोक संतप्त पिता भंवरलाल मेघवाल एवं अन्य परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि एक ही परिवार के चार युवाओं का असामयिक निधन अत्यंत दुखद एवं अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं हो सकती। इस कठिन समय में उनकी संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ हैं।

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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील नेतृत्व में राज्य सरकार पीड़ित परिवार की हरसंभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध है और संकट की इस घड़ी में परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। इस दौरान बालाराम मूंढ़ एवं जिलाध्यक्ष भरत मोदी भी मौजूद रहे। बता दें कि बालोतरा के पाटोदी क्षेत्र में मंगलवार को हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था।

रोडवेज बस-कार की हुई थी टक्कर

रोडवेज बस और कार की आमने-सामने हुई भिड़ंत में कार सवार 4 सगे भाइयों की मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। चारों भाई मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे और अब घर में कोई कमाने वाला नहीं बचा है। उनके माता-पिता बुजुर्ग हैं। चारों भाई प्रतिदिन कमठे पर मजदूरी और कारीगरी का कार्य करते थे। सोमवार को अमावस्या होने के कारण अवकाश था और पूरा परिवार एक साथ घर पर रहा। मंगलवार सुबह चारों भाई हमेशा की तरह काम पर जाने के लिए निकले थे, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी अंतिम यात्रा साबित होगी।

ग्रामीण भी अपने आंसू नहीं रोक पाए

दुर्घटना के बाद गांव में ऐसा सन्नाटा पसरा मानो किसी ने पूरे इलाके की आवाज छीन ली हो। हादसे के बाद रोते-बिलखते भंवरलाल बार-बार यही कहते रहे, 'कल तक मेरे चार बेटे थे, आज एक भी नहीं बचा। कोई तो बच जाता, अब घर कैसे चलेगा?' उनकी चीखें सुनकर वहां मौजूद रिश्तेदार और ग्रामीण भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। घर में ऐसा माहौल था कि सांत्वना देने पहुंचे लोग भी फफक-फफक कर रो पड़े। बता दें कि यह हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

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