
भाजपा-कांग्रेस की प्रतीकात्मक तस्वीर। (फाइल फोटो- ANI)
बाड़मेर। पंचायतीराज चुनाव की आहट के साथ ही बाड़मेर जिले में सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस जहां अंदरूनी गुटबाजी को साधने में जुटी है, वहीं भाजपा विकास कार्यों को चुनावी मुद्दा बनाकर रणनीति तैयार कर रही है। इस बार चुनाव का गणित पिछले चुनावों से अलग होगा, क्योंकि बालोतरा जिला बनने के बाद बाड़मेर जिला परिषद का पूरा राजनीतिक भूगोल बदल गया है। नए परिसीमन से वार्डों की संख्या, ग्राम पंचायतों का दायरा और जातीय व क्षेत्रीय समीकरण बदलने से जिला प्रमुख से लेकर प्रधानों के चुनाव तक नई रणनीति तैयार की जा रही है।
बालोतरा जिले के गठन के बाद बाड़मेर जिला परिषद में अब 39 के स्थान पर 37 वार्ड रह गए हैं। वहीं ग्राम पंचायतों की संख्या 685 से घटकर 625 हो गई है। जिले में अब 17 पंचायत समितियां, सात उपखंड, 11 तहसीलें और सात उप तहसीलें होंगी। राज्य सरकार ने गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंड को बालोतरा जिले में शामिल किया, जबकि बायतु तहसील को बाड़मेर जिले में जोड़ दिया। इसके बाद जिला परिषद वार्डों का पुनर्गठन किया गया। अब बाड़मेर जिले में सात उपखंड, 11 तहसीलें, सात उप तहसीलें, 17 पंचायत समितियां और 625 ग्राम पंचायतें होंगी।
नए परिसीमन के बाद जिला परिषद के 37 वार्डों में सर्वाधिक 13 वार्ड चौहटन क्षेत्र में हैं। शिव विधानसभा क्षेत्र में 11, बाड़मेर में आठ और बायतु में तीन वार्ड हैं। इसके अलावा गुड़ामालानी विधानसभा क्षेत्र के दो वार्ड भी बाड़मेर जिला परिषद में शामिल किए गए हैं। ऐसे में जिला प्रमुख के चुनाव में चौहटन और शिव क्षेत्र के निर्वाचित सदस्य सत्ता की चाबी साबित हो सकते हैं। राजनीतिक दल भी इन क्षेत्रों पर विशेष फोकस कर रहे हैं।
यह वीडियो भी देखें
जिले की 17 पंचायत समितियों में 266 वार्ड सदस्य चुने जाएंगे, जो 17 प्रधानों का चुनाव करेंगे। बाड़मेर और चौहटन पंचायत समिति में सर्वाधिक 19-19 वार्ड हैं। पंचायत समितियों के परिसीमन में अपेक्षाकृत कम बदलाव हुआ है, लेकिन जिला परिषद के नए वार्डों ने चुनावी रणनीति पूरी तरह बदल दी है।
चुनाव की संभावित घोषणा से पहले ही जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य बनने के इच्छुक दावेदार अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं। सामाजिक कार्यक्रमों, जनसंपर्क और संगठनात्मक बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। राजनीतिक दल भी जीत के समीकरण साधने के लिए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर मंथन कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बार पंचायतीराज चुनाव में नए परिसीमन का असर टिकट वितरण से लेकर जिला प्रमुख के चुनाव तक साफ दिखाई देगा।
Updated on:
06 Aug 2026 02:42 pm
Published on:
06 Aug 2026 02:42 pm
