8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

हर महीनें लेना पड़ रहा हजारों का कर्जा, पहले ब्रेन हेमरेज फिर किडनी डेमेज जैसी बीमारियों ने घेरा

पहले ब्रेन हेमरेज और फिर लंबे समय तक इलाज के चलते दोनों किडनी 90 प्रतिशत डेमेज, अब ट्रांसप्लांट के इंतजार में सप्ताह में दो बार डायलिसिस।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

बाड़मेर

•

image

Nupur Sharma

•

Updated: 13 Jun 2023, 4:03 PM IST

Bhanaram Godara Of Barmer Is Suffering From Serious Diseases, Government And Bhamashah Card Help In Rajasthan

बाड़मेर/चौहटन। पहले ब्रेन हेमरेज और फिर लंबे समय तक इलाज के चलते दोनों किडनी 90 प्रतिशत डेमेज, अब ट्रांसप्लांट के इंतजार में सप्ताह में दो बार डायलिसिस।

ये कहानी है चौहटन उपखंड क्षेत्र के जैसार पंचायत के हनुमानपुरा निवासी 45 वर्षीय भानाराम गोदारा की। उसे वर्ष 2015 में ब्रेन हेमरेज की गम्भीर बीमारी ने जकड़ लिया, जिसका एमडीएम अस्पताल जोधपुर में इलाज चल रहा था। 2020 में कोरोना काल में लॉकडाउन लग गया। अस्पताल में आने जाने की बंदिशों के बीच उसे चेकअप किए बिना पर्ची पर दवाइयां जारी थी। ऐसा होने से अत्यधिक बीपी बढ़ने और लंबे समय तक दवाइयां लेने से दोनों किडनी पर प्रभाव पड़ना शुरू हो गया और धीरे-धीरे 2022 अंत तक दोनों किडनियों में 90 प्रतिशत खराब होने का पता चला।


यह भी पढ़ें : कहासुनी के चलते बीच रास्ते में दो युवकों को घेरकर ताबड़तोड़ चाकुओं से किया हमला

डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी लेकिन जब तक उसे एबी नेगेटिव किडनी नहीं मिलती है तब तक इसे ब्लड डायलिसिस करते रहना होगा। भानाराम के बड़े भाई मोहनलाल ने बताया कि वे मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ भी नहीं ले पा रहे हैं। ब्लड डायलिसस के दौरान दवाइयां बाहर से लानी पड़ती है। अब परिवार के सामने इलाज तो क्या खाने को भी लाले पड़ रहे हैं। सप्ताह में दो-दो बार डायलिसिस और उसके लिए ब्लड के जुगाड़ में पानी की तरह रुपए खर्च हो रहे हैं। किडनी कब मिलेगी इसका भी कोई निश्चित नहीं। अब भानाराम के परिवार को भामाशाह पर आस टिकी है।


यह भी पढ़ें : घूस ले ही रहे थे, कि पड़ गई ACB Raid, गिरदावर समेत तीन दलाल अरेस्ट, जानें पूरा मामला

हर माह लेना पड़ रहा है 25 हजार का कर्जा
भानाराम की 80 वर्षीय मां पथराई आंखों से अपने बेटे को देखती है। भानाराम की पत्नी रामू देवी ने बताया कि परिवार में बूढ़ी मां, एक 12 वर्षीय बेटा व तीन छोटी बेटियां है। ऐसे में अब आमदनी का कोई जरिया नहीं है। पति के इलाज के लिए बचत की राशि व सारे जेवरात भी बेच दिए। थोड़ी बहुत खेती व भेड़ बकरियां पालकर बड़ी मुश्किल से गुजारा होता था, लेकिन अब प्रति माह 25 से 30 हजार का कर्जा लेकर सप्ताह में दो बार डायलिसस करवाया जा रहा है।