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शहर से कुछ दूरी पर स्थित एक गांव के मध्य में सुबह 9 बजे बच्चे फुटबाल खेल रहे थे। महिलाएं तालाब से पानी की मटकियां लेकर गुजर रही थी। कुछ बुजुर्ग व युवा योग करने में व्यस्त हैं। सबकुछ सामान्य था कि अचानक खतरे का सायरन बजा। कुछ ने सुना तो कुछ ने अनसुना किया लेकिन इसी दौरान हवाई हमले से बम धमाके होने लगे। इससे कई लोग घायल हो गए। हमले की सूचना एयरफोर्स स्टेशन से जिला नियंत्रण कक्ष को मिली। जहां से तुरंत घटना नियंत्रक अधिकारी आईसीओ को मौके पर भेजा जाता है। जो मौके पर जाकर नियंत्रण कक्ष को सूचना देता है। घटना स्थल पर चारों तरफ दर्जनों घायल लोग कहरा रहे थे एवं बचाने की मांग कर रहे थे। तीन स्थानों पर आग ही आग नजर आ रही थी। यहां पर पास में ही एक जीवित बम भी पड़ा हुआ है।
नागरिक सुरक्षा के स्थानीय स्वयंसेवक सबसे पहले पहुंचते हैं जो एक तरफ घायलों को स्ट्रेचर व स्थानीय तरीके से गांव के ही स्वास्थ्य केन्द्र तक ले जाने का कार्य कर रहे थे। कई स्वयंसेवक प्राथमिक उपचार तो करीब दो दर्जन स्वयं सेवक अपने स्तर पर आग पर काबू पाने का जतन कर रहे थे। मौके पर उपस्थित आपदा टीम ने जीवित बम को अपने कब्जे में लिया। वहां पर आईसीओ ने टीम के सदस्यों को बम निरोधक दस्ते के पहुंचने तक यहां पर सजग रहकर गश्त करने को कहा।
स्वयंसेवक दो छोटे स्थानों पर आग बुझाने में सफल हो जाते हैं लेकिन तीसरे स्थान पर आग ने विकराल रूप ले लिया था। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड वाहन पहुंचता है, जो करीब बीस मिनट में आग पर काबू पा लेता है। इस दौरान वहां पर एम्बुलेंस पहुंच जाती है। उपस्वास्थ्य केन्द्र पर मेडिकल टीम की ओर से प्राथमिक उपचार करने के बाद चारों गंभीर घायलों को जिला स्तर के चिकित्सालय रैफर किया गया। वहीं करीब छह जनों का प्राथमिक उपचार किया गया।
दरअसल, यह नागरिक सुरक्षा के 54 वें स्थापना दिवस के अवसर पर मंगलवार को आयोजित मॉक ड्रिल का घटनाक्रम था। जिसमें विभाग के स्वयंसेवकों ने तत्परता दिखाते हुए कई लोगों की जान बचाने का जीवंत प्रदर्शन किया। इस दौरान हमले के बाद बम विस्फोट में घायलों को बचाने व राहत पहुंचाने के कार्य को सफलता के साथ अंजाम दिया गया।
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