यह समस्या करीब दो दशक से चल रही है, लेकिन समाधान नहीं हो पा रहा था। जब भी कोई हादसा होता तो मांग उठती, जनप्रतिनिधि व प्रशासन हटाने की बात कहता और मामला कुछ दिन बाद ठंडे बस्ते में चला जाता। लम्बे समय से यह स्थिति रही है। हो चुका है हादसा- हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आने से जिले के मूंगड़ा गांव में मई २००८ में दो बच्चे पेड़ पर चढ़े हुए थे, जिसमें से गुजर रही विद्युत लाइन की चपेट में आए। इसमें से एक की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद कई बार विद्युत लाइनें व ट्रांसफार्मर हटाने की मांग उठती रही, लेकिन समाधान नहीं हो पाया। विद्युत लाइन हटाने का कौन दे खर्चा- सरकारी विद्यालयों से विद्युत लाइन हटाने को लेकर बड़ी समस्या बजट की आ रही थी। विद्यालयों के पास बजट नहीं होने पर वे चाहकर भी लाइनें हटा नहीं पा रहे हैं। जबकि नियमानुसार लाइनें हटाने के लिए बजट की जरूरत रहती है। एेसे में मामला अभी तक अधरझूल में ही है। अब लगी आस- मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों यह घोषणा की थी कि पूरे प्रदेश में सरकारी विद्यालयों से विद्युत तंत्र को हटा विद्यार्थियों के सिर से खतरा कम किया जाएगा। इस घोषणा से बजट की समस्या का हल हो चुका है। एेसे में आस है कि जल्द ही जिले के विद्यालय हाईटेंशन से मुक्त होंगे।