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ढाई साल की बेटी ने भरा पहला पांव, नम हो गई मां की आंखें

-एक पांव के साथ पैदा हुई थी चंचल-बाड़मेर में लगे शिविर में लगाया कृत्रिम पांव

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ढाई साल की बेटी ने भरा पहला पांव, नम हो गई मां की आंखें

ढाई साल की बेटी ने भरा पहला पांव, नम हो गई मां की आंखें

बाड़मेर. दिव्यांग पैदा हुई ढाई साल की बच्ची चंचल अब अपने दोनों पैरों पर खड़ी हो सकेगी और चल भी पाएगी। बाड़मेर में आयोजित विकलांग सहायता शिविर चंचल के लिए वरदान साबित हुआ है।
जन्म से एक पांव के साथ चंचल के जीवन में संघर्ष ही दिख रहा था। लेकिन भारत विकास परिषद मुख्य शाखा बाड़मेर और बाड़मेर जन सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान आयोजित निशुल्क विकलांग शिविर में भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर के दक्ष तकनीशियन गोविंद शर्मा ने ढाई साल की बालिका के एक पांव लगातार उसे चलने की हिम्मत के साथ ताकत भी दे दी।
मां के चेहरे पर दिखे संतोष के भाव
शाखा अध्यक्ष किशोर शर्मा बताते हैं कि बालिका को कृत्रिम पांव लगने पर बालिका द्वारा उठाया गया पहले कदम ने मां दरिया की आंखों को सजल कर दिया। उसके चेहरे पर संतोष और आशा के भाव के साथ ही वह हर किसी को आभार प्रकट करती नजर आई।
आत्मनिर्भरता का उद्देश्य हुआ पूरा
बाड़मेर जन सेवा समिति के ओम प्रकाश मेहता का कहना है कि शिविर दिव्यांगों की सेवा के लिए ही नहीं अपितु समाज की मुख्य धारा से जुडऩे और आत्म निर्भरता के लिय प्रेरित करने के उद्देश्य को लेकर किया गया। भारत विकास परिषद के उपाध्यक्ष (सेवा ) ओम जोशी बताते हैं कि दिव्यांग बच्चों को दया की नही हौंसले की जरूरत है। फिर इस स्थिति में हम लोग जब इन्हें सम्बलन प्रदान करते हैं तो इन्हें आभास होता है कि मैं भी अन्य बच्चों की तरह अपने पैरों से चल फिर सकती हूं। मैं भी चलकर स्कूल जा सकती हूं और उन लड़कियों के साथ पढ़-लिख और खेल सकती हूं।

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