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नहीं रहा ‘जंवाई राजा चोर’

हिस्ट्रीशीटर : घर में घुसकर छेड़छाड़ व चोरी के 17 मामले हुए थे दर्ज, लोक-लाज के कारण कई मामले नहीं आए सामने

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bhawani singh

Jun 11, 2016

jiyaram

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'जंवाई राजा चोर' के नाम से कुख्यात सिणधरी थाने का हिस्ट्रीशीटर जीयाराम पोठा खारिया खुर्द की सरहद में स्थित एक ढाणी में शनिवार सुबह मृत मिला। उसकी मौत शनिवार तड़के करीब चार बजे हुई। पुलिस को इसकी जानकारी सुबह 11 बजे मिली। करीब साढ़े तीन दशक तक पुलिस को छकाने वाले जीयाराम के शव को पुलिस के आने से पहले किसी ने हाथ भी नहीं लगाया। पुलिस ने शव बरामद कर पोस्टमार्टम करवाकर अंतिम संस्कार करवाया।

एेसे बना 'जंवाई राजा चोर'

जीयाराम से जुड़े मामलों की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों की मानें तो जीयाराम को किशोरावस्था में ही चोरी की लत लग गई। चोरी की वारदातों को सफाई से अंजाम देने के लिए उसने जंवाई राजा बनने का स्वांग किया। दूर-दराज की एकल ढाणियों पर जीया निगाह रखता। वह यह ध्यान रखता कि किस घर में नई-नई शादी हुई है और दुल्हन पहली बार पीहर आई हुई है। दुल्हन के परिजनों को जंवाई राजा का इंतजार है। वह उस घर पहुंच जाता, जहां पुरुष सदस्य नहीं होता। रात के अंधेरे में जंवाई बनकर वह गुडाळ (झोंपे) में रुक जाता। फिर देर रात चोरी की वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाता।

अस्सी व नब्बे के दशक में दहशत

साढ़े तीन दशक तक जीयाराम ने दर्जनों घरों में जंवाई बनकर मौज उड़ाई, परन्तु अब तक उसके विरुद्घ विभिन्न थाना हलकों में घर में घुस कर महिलाआें से छेड़छाड़ व चोरी के 17 प्रकरण ही दर्ज हुए। इन दो दशकों में रेगिस्तानी क्षेत्र की परिस्थितियां इस तरह का अपराध करने वाले का साथ दे रही थी। ढाणियों में बिजली की सुविधा नहीं थी। मोबाइल नहीं थे। महिलाएं जंवाई के सामने नहीं जाती थी।

जीयाराम ने इन हालात का भरपूर फायदा उठाया। लेकिन पहली बार जीयाराम के विरुद्घ वर्ष 1988 में चौहटन थाने में घर में घुसने का मामला दर्ज हुआ। वर्ष 1990 व 1991 में सिणधरी, 1992 में समदड़ी, 1993 में धोरीमन्ना, 1995 में चौहटन, 1996 में सिणधरी थानान्तर्गत रात्रि में घर में घुसकर चोरी करने के मामले दर्ज हुए। वर्ष 1994 में सिणधरी थाने में उसके विरुद्ध छेड़छाड़ का मामला दर्ज हुआ। 1994 में पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट खोल दी। इसके बाद वर्ष 2003 तक वह लगातार वारदातों को अंजाम देता रहा।

पत्रिका ने 2003 में किया था एक्सपोज

राजस्थान पत्रिका ने मार्च 2003 में सबसे पहले 'जंवाईराजा चोर' शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर जीयाराम की एेसी वारदातों का खुलासा किया था। एक्सपोज होने के बाद उसने एेसी वारदातों को अंजाम देना लगभग बंद कर दिया।

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