कोरोना में करोड़ों रुपए की कमाई देता रेगिस्तान

धन-धन धोरां धरती.....
बल्र्ब- कोरोनाकाल और प्रदेशभर में आर्थिक संकट। मार्च से अब तक एक ही बात कि आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो रही है लेकिन हमारी धोरां धरती धन-धन है। यहां के खनिज उत्पादों ने प्रदेश के खजाने को तो भरा ही खरीफ की फसल में राम ऐसा मेहरबान हुआ कि बेरोजगार होकर घर लौटे थारवासियों ने मेहनत करके खेतों से करीब 8 अरब की फसल लेकर बारहमास बाजरी का प्रबंध कर लिया। रिफाइनरी और पॉवर प्रोजेक्ट इस धरती को आने वाले सालों में भी आर्थिक संबल देने का शुभ संकेत दे रहे है।

By: Ratan Singh Dave

Published: 13 Nov 2020, 05:36 PM IST


रतन दवे
बाड़मेर पत्रिका.

यों हारा प्रतिदिन कोरोना का आर्थिक संकट
1. 10 करोड़ प्रतिदिन दिए
राज्य को कोरोनाकाल में आर्थिक संकट से जूंझना पड़ रहा था। प्रतिदिन पाई-पाई कीमती हो गई, इन दिनों में बाड़मेर के तेल की धार पतली जरूर हुई लेकिन 8 से 10 करोड़ रुपए प्रतिदिन राज्य कोष में राजस्व के रूप में मिले। केन्द्र का हिस्सा इससे तिगुना प्रतिदिन रहा।
2. 43129 करोड़ की रिफाइनरी
पचपदरा के सांभरा में बन रही रिफाइनरी का कार्य कोरोनाकाल में कुछ समय बंद रहा लेकिन अब फिर से कार्य गति पर है। करीब 23 हजार करोड़ के कार्यादेश हुए है। 2022 में कार्य पूर्ण होने का लक्ष्य है। अभी 3200 लोगों को रोजगार मिल रहा है। सरकार का दावा है कि आगामी तीन माह में यह संख्या 10 हजार के पार होगी। रिफाइनरी मेगा प्रोजेक्ट पर लग रहे करोड़ों रुपयों ने कोरोना में रोजगार के अवसर भी खोले है।
3. 1080 मेगावाट प्रतिदिन
बाड़मेर के भादरेस में पॉवर प्लांट आधारित कोयले की 135 मेगावाट की आठ इकाइयों से 1080 मेगावाट बिजली का उत्पादन प्रति घंटा हो रहा है। प्रदेश में करीब 11000 मेगावाट बिजली उत्पादित हो रही है। 20 प्रतिशत के करीब बाड़मेर का कोयला देता रहा। बिजली के उत्पादन में रही इस आत्मनिर्भरता ने न केवल प्रदेश को रोशन किया इससे जुड़े हजारों लोगों को रोजगार भी मिला।
4. 5379 करोड़ का सिक्सलेन
प्रदेश में सिक्सलेन हाईवे पंजाब-राजस्थान-गुजरात को जोडऩे के लिए करीब 1316 किमी बन रहा है। भटिंडा-पचपदरा- जामनगर रिफाइनरी को जोडऩे वाले इस हाईवे पर 5379 करोड़ व्यय होने है। कोरोनाकाल में भी चले इस कार्य ने रोजगार के अवसर दिए है। 24 माह में यह कार्य पूर्ण होगा।
5. अरब का बाजरा,घर-घर खुशी
कोरोनाकाल में सर्वाधिक परेशानी गरीब और किसान तबके को हो रही थी। रोजगार के अवसर समाप्त होने से रोजी रोटी पर संकट ऐसा छाया कि लोग राम से आस करने लगे। पिछले तीन साल से अकाल भुगत रहे लोगों की राम ने सुनी और इस बार खरीफ की पैदावार जमकर हुई। करीब आठ अरब की पैदावार में 3 अरब का बाजरा हुआ है जो यहां का मुख्य भोजन है। बारहमास की बाजरी के साथ मूंग-मोठ-ग्वार और काचरा-मतीरा की बंपर पैदावार ने धरतीपुत्रों को बड़ी राहत दी है।करीब 660 मेगावाट की इकाइयों का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा जा चुका है। यह कार्य भी शुरू होता है तो भादरेस प्रदेश का बड़ा केन्द्र बन जाएगा। रोजगार के भी बड़े अवसर बनेंगे।
दिवाली मनाइए,आगे दिन अच्छे है....
1. रबी पर रब मेहरबान
पिछले एक दशक में बाड़मेर की रबी पर रब मेहरबान रहा है। 15 अरब का जीरा और करीब 25 अरब की फसलें ले रही धोरा धरती के 5500 के करीब कृषि कुओं पर इस सर्दी में भी किसान तैयार हो गया है। उम्मीद है कि रब की मेहरबानी रही तो दिवाली पर शुरू हुई बुवाई होली पर खुशियों के रंग बिखेरेगी।
2. चल पड़ेगी रेल तो अलग होगा खेल
खुशखबरी यह है कि सिक्सलेन ग्रीन हाईवे के साथ रेलवे लाइन बिछाने का प्रस्ताव भी केन्द्र तक पहुंच गया है। धोरा-धरती के कायाकल्प में यह नींव का पत्थर होगा। करोड़ों रुपए का यह प्रोजेक्ट आते ही थार के लिए परिवहन का बड़ा मार्ग खुलेगा और तीन रिफाइनरी और तीन राज्यों से रेल सुविधा का बड़ा

Ratan Singh Dave
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