
desert has kept water hidden in Anchal This plan will now be made
बाड़मेर.थार का रेगिस्तान जो सालों से बूंद-बूंद पानी को तरसता रहा है आप अचंभा करेंगे कि उसके आंचल में इतना पानी दबा रखा है कि अब इस पानी से रिफाइनरी के यहां स्थापित होने वाले अन्य इंडस्ट्री के लिए पेयजल की बड़ी समस्या का हाल हो सकता है। तेल खोजने आई कंपनियों के लिए यह अचरजभरा रहा कि जिस रेगिस्तान में बूंद-बूंद पानी को मीलों लोग सफर करते रहे है वो अपने आंचल में पानी छुपाकर बैठा है। अब इसके लिए सोलर की उन्नत तकनीक के माध्यम से गहराई में छिपे इस पानी के 'वाटर लेवलÓ को बढ़ाया जाएगा। लवणीय पानी के परिशोधन की भी योजना बनेगी।
- कंपनियों ने राज्य व केन्द्र सरकार को भेज रखी है पानी की रिपोर्ट
- लवणीय पानी होने से पीने योग्य नहीं, बनाया जा सकता है पीने योग्य
तेल खोज को आई कंपनियों को यहां बायतु के पास माडपुरा बरवाला में पानी का बड़ा भण्डार मिला और मंगला टर्मिनल के लिए इसका उपयोग लिया गया। इसके बाद 250 के करीब तेल कुएं जहां-जहां भी तलाश किए गए है वहां-वहां पानी के भण्डार सामने आ रहे है। इस पर कंपनी ने सरकार को साझा किया और सरकार ने इसको केन्द्र तक। अब इसको लेकर योजना बनने लगी है।
पानी लवणीय है जिसको होगा उपचार- रेगिस्तान में यह पानी दरअसल लवणीय है। साथ ही यह पानी तेल और जमीन के बीच की फार्मेशन में है। भू वैज्ञानिक मानते है कि जैसे कोई समंदर इस रेगिस्तान में तैर रहा है। एेसे में इस पानी का उपयोग पेयजल के लिए मुश्किल है लेकिन अन्य गतिविधियों के लिए हो सकता है।
सोलर से पानी का लेवल लाया जाएगा ऊपर- केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय अब इसके लिए सोलर की उन्नत तकनीक के जरिए पानी के लेवल को ऊपर लाने का कार्य करेगा। इसके लिए जैसलमेर स बाड़मेर में सोलर एनर्जी का बड़ा प्लांट लगाया जाएगा।
पानी से होगी लवण परिशोधित- इस पानी में लवण की मात्रा अधिक है और संभवतया रिफाइनरी के लिए भी इस पानी का उपयोग हो सकता है। इसके लिए जहां रिफाइनरी तेल का परिशोधन करेगी इस लवणीय पानी के परिशोधन के लि भी यहां प्लांट लगेंगे। गौरतलब है कि यहां के लवणीय पानी को मीठा करने के लिए पूर्व में रक्षा मंत्रालय के विशेष वैज्ञानिक रहते हुए डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने भी यहां जलनिर्वणीकरण प्रयोगशालाएं लगाई थी।
तेल कुओं के पानी के साथ सरस्वती पर होगा काम
क्रूड ऑयल और जमीन के बीच में कई जगह पानी के बड़े भण्डार मिलना अचरजजनक रहा है। यहां सरस्वती नदी के भी प्रमाण है। इसको लेकर अब भारत सरकार का पेट्रोलियम मंत्रालय कार्य करेगा। तेल कंपनियों से जानकारी ली गई है और इस पर कंपनियों के साथ मिलकर उन्नत तकनीक से यह प्लांट लगाकर पानी का उपयोग लंेगे।- धर्मेन्द्र प्रधान, केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री
Published on:
18 Jan 2018 10:53 am
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