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शिक्षा के बिना विकास सम्भव नहीं

- सिलोर में जलगृह व स्कूल में कक्षाकक्षों का लोकार्पण कार्यक्रम

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शिक्षा के बिना विकास सम्भव नहीं

शिक्षा के बिना विकास सम्भव नहीं


समदड़ी. सिलोर ग्राम पंचायत में सांसद अभिषेक मनु सिंघवी के कोष से निर्मित सार्वजनिक जलगृह एवं राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में अतिरिïक्त कक्षाकक्ष व प्रयोगशाला कक्ष का लोकार्पण भारत साधु समाज के राष्ट्रीय सचिव महंत निर्मलदास व सरपंच रेशमाकंवर राजपुरोहित की अध्यक्षता में हुआ। महंत ने नर सेवा नारायण सेवा पर बल देते कहा कि सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य है। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करते हुए कहा कि शिक्षा की विकास की कड़ी है। शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पहाड़सिंह राजपुरोहित व सुमेरसिंह कानोडिय़ा ने भी शिक्षा की महत्ता पर प्रकाश डाला। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर प्रेमसिंह सोंकड़ा, जोधपुर हाईकोर्ट के सहायक लोक अभियोजक श्रवणसिंह, पूर्व सरपंच शांतिदेवी, माधुसिंह राजपुरोहित, रामेश्वरदास संत, जवाराराम भील आदि ने भी विचार व्यक्त किए। एसएमसी अध्यक्ष देवीसिंह ने आभार व नागदेव गोशाला अध्यक्ष टीकमसिंह राजपुरोहित ने आभार जताया। निसं.

धोरीमन्ना .

उपखण्ड मुख्यालय की पहाड़ी पर स्थित बिश्नोई समाज के नवनिर्मित जम्भेश्वर मंदिर का सात दिवसीय कलश स्थापना महोत्सव जाम्भाणी हरिकथा के छठे दिन रविवार को आचार्य डॉ. गोवर्धनराम शिक्षा शास्त्री ने कहा कि पंचगव्य पूजा में प्रयुक्त होते हैं। गाय विश्व की माता व सर्वोच्च सुखों की दाता है। आचार्य रामानंद मुकाम ने कहा कि नशा नाश का द्वार है। उन्होंने हर प्रकार के नशे का परित्याग करने को कहा। साथ ही मृत्यु भोज, बाल विवाह आदि सामाजिक बुराइयों का त्याग करने को कहा। उन्होंने कहा कि संस्कारित शिक्षा आज के समय की महती आवश्यकता है। मनोहरदास शास्त्री मेहराणा धोरा पंजाब ने कहा कि सत्संग से जीवन में निखार आता है। इसके माध्यम से ही हिताहित का ज्ञान कराने वाला विवेक जागृत होता है। वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम बिश्नोई ने वन्य जीव संरक्षण व आचार-विचार सुधारने की बात कही। कथा में भामाशाहों का सम्मान किया गया। सामाजिक व धार्मिक विषयों पर आधारित प्रश्नोत्तरी में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। इस दौरान महंत गोपालदास, सन्त पुरुषोत्तमदास, सदानन्द महाराज, महंत छगनप्रकाश समराथल धोरा, बबलू तेतरवाल, प्रकाश खिलेरी, जगदीश ढाका सरपंच, प्रकाशचंद खीचड़, भागीरथ ढाका, कोशलाराम खीचड़, पूनमाराम, श्रीराम ढाका, सुरेश ढाका, ओमप्रकाश गोदारा सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे। संचालन रामजीवन खिलेरी व सुखराम विश्नोई ने किया।

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