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गांवों में डिजिटल इंडिया क सपना धराशायी, 15 मशीनेें फांक रही धूल

आमजन को नहीं जानकारी

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रावताराम सारण सिणधरी बाड़मेर . सरकार की ओर से ग्राम पंचायत भवनों में लगाई गई ई-मित्र प्लस मशीनें उपयोग में नहीं लेने के कारण धूल फांक रही है। आलम यह है कि अधिकारी ई-मित्र ऑपरेटर के माध्यम से ई-मित्र प्लस मशीन का संचालन कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों को इसकी कोई जानकारी नहीं होने के कारण ये कबाड़ हो रही हैं। जयपुर तक एक्टिवेट दिखाने के लिए महीने में एक-दो ट्रांजेक्शन करवा दिए जाते हैं, लेकिन आमजन को इसका लाभ न के बराबर पहुंच रहा है।

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मिल सकती है ये सेवाएं
राज्य सरकार ने ई-मित्र प्लस मशीन में गिरदावरी, जमाबंदी, नकल, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति, मूल निवास प्रमाण पत्र, प्रिंट व बिजली पानी का बिल जमा करने सहित कई प्रकार की सरकारी व निजी सेवाएं आधुनिक तकनीकी के माध्यम से देने के लिए योजना चलाई थी। मशीन में मौजूद में कैमरे से आम नागरिक उच्च अधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बात कर सकते हैं।

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अलग से नहीं कोई ऑपरेटर
जानकारी के अनुसार ई-मित्र प्लस मशीन संचालित करने के लिए अलग से ऑपरेटर निर्धारित नहीं किया गया है। इससे ग्राम पंचायत स्तर पर ई-मित्र चलाने वाले ई-मित्र धारी को मशीन चलाने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन अलग से कोई बजट या मेहनताना नहीं मिलने से वे रुचि नहीं ले रहे हैं।
लोगों में लाए जागरूकता तो मशीनों का हो उपयोग- इन ई-मित्र प्लस मशीनों को लेकर जिला प्रशासन प्रति ग्राम पंचायत मुख्यालय में शिविर आयोजित कर लोगों में जागरूकता लाए तो यह उपयोगी साबित हो सकती है। इससे आमजन अपने गांव में ही सभी सरकारी डिजिटल सुविधाओं का स्वयं उपयोग कर सकेंगे। - मोहनकुमार चौधरी, सूचना प्रौद्योगिकी व संचार विभाग बाड़मेर

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