आधी खुशी दे रही दुगुना गम

- बिना परीक्षा के पास तो हो गए, अगले सत्र की चिंता
- विज्ञान वर्ग के अभ्यर्थी सर्वाधिक चिंतित
- पे्रक्टिकल छूटे, थ्योरी का भी नहीं मिल रहा ज्ञान

By: Dilip dave

Updated: 26 Aug 2020, 08:20 PM IST



बाड़मेर. कोरोना संक्रमण के बीच भले ही कॉलेज व स्कू  ल में बिना परीक्षा के विद्यार्थी पास हो गए, लेकिन जैसे-जैसे कोरोना के साथ स्कू  ल-कॉलेज बंद होने की सूचना मिल रही है, वैसे-वैसे अधिकांश विद्यार्थियों की चिंता बढ़ रही है। हालांकि बिना पढ़े ही पास होने से थोड़ी खुशी जरूर मिली, लेकिन अब अगली कक्षा में बेड़ा कैसे पार होगा यह बात दुगुनी चिंता दे रही है।

विशेषकर कॉलेज स्तर में स्नातक तृतीय वर्ष के विद्यार्थी चिङ्क्षतत है, क्योंकि आगे उनको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनी होगी, जिसमें पहले की पढ़ाई महत्वपूर्ण होती है जबकि उनको द्वितीय वर्ष में बिना पढ़े ही पास कर दिया और तृतीय वर्ष का आधा सत्र बिना पढ़ाई के बीत गया। देश में कोरोना महामारी को रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने २२ मार्च को जनता कफ्र्यू लगाया तो अगले दो दिन बाद देशव्यापी लॉकडाउन। इस लॉकडाउन के दौरान देश में आवाजाही बंद रही तो स्कू  ल, कॉलेज पर ताला लगा रहा।

मार्च व अप्रेल में परीक्षा का समय होने पर सभी परीक्षाएं रद्द हो गई। इसके बाद करीब दो माह बाद २२ मई को अनलॉकडाउन हुआ तो काफी कुछ राहत मिली, लेकिन कॉलेज, स्कू  ल में अभी भी लॉकडाउन ही है। इसके चलते शिक्षण कार्य पूरी तरह से ठप है, हालांकि ऑनलाइन शिक्षण की बात कही जा रही है, लेकिन यह मात्र औपचारिकता ही है।

बैठे बिठाए हो गए पास- परीक्षा नहीं होने पर छोटी कक्षाओं से लेकर कॉलेज स्तर पर अगली कक्षा में विद्यार्थियों को प्रमोट कर दिया। हालांकि प्रदेश में दसवीं व बारहवीं बोर्ड की शेष रही परीक्षाएं करवाई, लेकिन अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों को वार्षिक परीक्षा नहीं देनी पड़ी।

वहीं कॉलेज स्तर पर भी बिना परीक्षा के पास किया गया। अब एक-एक दिन भारी- पिछले पांच माह से किताबों से दूर विद्यार्थियों को अब अपने भविष्य की चिंता है। सितम्बर आने वाला है और अभी तक कोरोना का कहर जारी है। प्रदेश व जिले में कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है।

एेसे में लग रहा है कि आगामी एक-डेढ़ माह तक शिक्षण कार्य शायद ही हो। इस पर कॉलेज स्तर व बारहवीं में आ चुके विज्ञान वर्ग के विद्यार्थी सर्वाधिक परेशान है।क्योंकि उनको प्रेक्टिकल करना होता है जो इन दिनों बंद है। वहीं कठिन विषय होने से बिना मार्गदर्शन के घर पर शिक्षण कार्य भी करना मुश्किल हो रहा है।

पढ़ाई हो रही बर्बाद- विज्ञान वर्ग में प्रेक्टिकल होता है, जो प्रेक्टिकल लैब में ही हो सकता है। स्कू  ल, कॉलेज बंद होने से प्रेक्टिकल कहां करेंगे यह तय नहीं है। अब तो जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, वैसे-वैसे आगामी कक्षा की पढ़ाई को लेकर चिंता सता रही है।- रवीना, कॉलेज छात्रा विज्ञान वर्ग

कोई निर्णय जरूरी- जब बाजार खुल चुके हैं तो फिर कॉलेज व स्कू  ल में विशेषकर बड़ी कक्षाओं की पढ़ाई क्यों बर्बाद की जा रही है। सोशल डिस्टेंस की पालना व मास्क की अनिवार्यता के साथ शिक्षण कार्य करवाया जा सकता है। सरकार इस बारे में सोचे।- रघुवीरसिंह तामलोर, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष पीजी कॉलेज बाड़मेर

Dilip dave Desk
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