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बॉर्डर के गांवों में पेयजल संकट, डेढ हजार बेरियों की मरम्मत अधरझूल!

- डेढ साल पहले बेरियों के जीर्णोद्धार को लेकर करवाया था सर्वे, बॉर्डर के गांवों में है वर्षो पुरानी 1700 बेरियां
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बाड़मेर

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bhawani singh

•

Updated: 28 Jun 2021, 8:01 PM IST

Drinking water Problem in border villages

Drinking water Problem in border villages

बाड़मेर.
यहां गडरारोड़ क्षेत्र के बॉर्डर पर अनेक गांवों में पेयजल संकट है। दूरस्थ गांवों में पानी के सरकारी स्त्रोत ही नहीं है। दो साल पहले जिला प्रशासन ने बॉर्डर के गांवों में पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए बेरियों का जीर्णोद्धार करवाने के लिए सर्वे करवाया था। सर्वे के दौरान करीब 1700 बेरियों के मरम्मत करने का वादा किया था, लेकिन डेढ साल बीतने के बावजूद कार्य कागजों में सिमट कर रह गया है।


सीमावर्ती रामसर, गडरारोड़ क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में नरेगा के तहत करीब 1700 बेरियों का जीर्णोद्धार करवाना प्रस्तावित था। इसके तहत बेरियों की गाद निकालने के साथ-साथ चारों ओर पक्का स्ट्रक्चर का निर्माण करना था। ताकि बेरियों में रेत गिरने की समस्या खत्म हो जाती। बेरियों की गहराई तक पक्का निर्माण होना था। हालांकि प्रोजेक्ट के तहत करीब 200 बेरियों का जीर्णोद्धार किया गया, उसके बाद यह प्रोजेक्ट अधरझूल हो गया। बॉर्डर के गांवों में बेरियों का निर्माण जनहित को देखते हुए किया गया था।


रोहिड़ी के हैडपंप रह गया सपना
बॉर्डर के रोहिड़ी ग्राम पंचायत के छह राजस्व गांव में परम्परागत दो दर्जन बेरियां है, लेकिन बेरियों में रेत गिरने से पानी की आवक कम हो गई है। रोहिड़ी गांव में पेयजल संकट को देखते हुए दो साल पहले राज्य सरकार ने दो हैडपंप की तत्काल स्वीकृति जारी की, लेकिन उसकी वित्तीय स्वीकृति अब तक नहीं मिली है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए महज यह सपना रह गया।


बेरियों से बुझती है प्यास
बॉर्डर के गांवों में बेरियों से एक घंटे में करीब 50 से अधिक महिलाएं पानी भरकर ले जाती हैं। इसके अलावा ग्रामीण घड़ों तथा अपने परंपरागत साधनों से पानी लेकर जाते हैं। बारिश होने के बाद बेरियों जल स्तर बढ़ जाएगा। इसके बाद पूरे वर्ष तक ग्रामीण इसी पानी का उपयोग करते हैं।


- बेरियों का जीर्णोद्धार किया जाएं
बॉर्डर के गांवों में बेरियां ग्रामीणों के लिए फायदेमंद है। सरकार इन बेरियों का जीर्णोद्धार करवाया जाए ताकि आमजन के साथ पशुधन को पेयजल संकट से राहत मिलेगी। पूर्व में नरेगा के तहत बेरियों का जीर्णोद्धार हुआ था, उसी तरज पर काम किया जाएं। - ईशाकखान, सरपंच, रोहिड़ी


- प्रस्ताव मांगे है
जिला परिषद ने सीमावर्ती क्षेत्रों में पेयजल संकट को देखते हुए डेढ साल पहले बेरियों का सर्वे करवाया था। उस दौरान करीब 200 बेरियों का जीर्णोद्धार किया गया था। कोरोनाकाल होने के बाद काम बंद था। अब दुबारा प्रस्ताव मांगे है। - मोहनदान रतनु, सीईओ, जिला परिषद, बाड़मेर
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