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तीन साल से ताले में बंद जीएलआर का मीठा पानी, जानिए पूरी खबर

- सीमावर्ती मुनाबाव गांव में पेयजल की समस्या, वर्ष- 2018 में दो जीएलआर का निर्माण, एक में पानी खारा तो दूसरे पर लगा है विभाग का ताला

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barmer news

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बाड़मेर.
पश्चिमी सरहद का अंतिम गांव मुनाबाव। जहां अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन है, लेकिन यह गांव पानी की बूंद-बूंद के लिए आजादी के बाद तरस रहा है। कहने को तो यहां जल्द विभाग ने लाखों रुपए खर्च कर तीन साल पहले दो जीएलआर का निर्माण करवाया हैै। लेकिन जीएलआर में खारा पानी निकलने पर उसे तो बंद कर दिया, जबकि दूसरे में मीठा पानी होने के बावजूद तालों में कैद है।


गडरारोड़ तहसील के मुनाबाव गांव में ग्रामीणों के लिए पेयजल के पुख्ता इंतजाम नहीं है। यहां सरकार ने केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड पश्चिमी क्षेत्र योजना के तहत वर्ष- 2018 में लाखों रुपए खर्च कर पेयजल स्त्रोत जीएलआर का निर्माण तो करवा दिया, लेकिन यह स्त्रोत निर्माण के बाद सूखे पड़े है और सरकारी पानी ग्रामीणों को नसीब नहीं हुआ है। विभाग ने यहां जीएलआर के साथ ट्यूबैल भी खोद रखे है, लेकिन जिम्मेदारों की अंधेरगर्दी के चलते ग्रामीणों को पानी की बूंद के लिए भटकना पड़ रहा है। यहां मुनाबाव गांव में पांच सौ अधिक आबादी निवासरत है।


संतोषजनक नहीं मिलता है
जबाव ग्रामीण बताते है कि मुनाबाव गांव में आजादी के बाद ग्रामीण बेरियों के पानी पर निर्भर थे, लेकिन बारिश कम होने पर अब धीरे-धीरे बेरियां सूख गई है। जरुरत अनुसार पानी नसीब नहीं हो रहा है। पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए सरकार ने दो जीएलआर का निर्माण तो करवा दिया, लेकिन पानी नहीं है। जलदाय विभाग के अधिकारियों को जब भी पेयजल संकट का दर्द सुनाते है तो कोई संतोषजनक जबाव नहीं मिलता है। पशुधन की पीड़ा लेकर गडरारोड़ पहुंचे तो जलदाय विभाग के अधिकारी ने कहा कि आप गौशाला में गाय को भेज दो।


- गंभीर संकट है
पेयजल समस्या को लेकर अधिकारियों को कई बार अवगत करवा दिया, लेकिन दूर तक कोई मददगार नजर नहीं आ रहा है। पशुधन के साथ गा्रीमणों की स्थिति बेहाल है। इस बार बारिश भी नहीं हुई है। - महेन्द्रसिंह, मुनाबाव


- पता करवाता हूं
मुनाबाव में कब जीएलआर बने है, यह प्रकरण मेरे ध्यान में नहीं है। इसका पता करवाता हूं, अगर बने हुए है तो काम में आने चाहिए। इसका जल्द समाधान करवाएगें। - सोनाराम बेनीवाल, अधिशाषी अभियंता, बाड़मेर

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