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आंधियों का कमाल… सोनाळी धरती पर रूपाळे धोरे

रेगिस्तान में चल रही आंधियों से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। हालांकि इससे धोरों की नैसर्गिक सुंदरता भी निखर कर सामने आई।

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Dust Storm In Desert Part Of Rajasthan

आंधियों का कमाल... सोनाळी धरती पर रूपाळे धोरे

बाड़मेर। रेगिस्तान में सात दिन चली आंधियों ने जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया। रेत इधर से उधर बवंडर बनकर उड़ी और धोरों की धरती में आसमान से जमीन तक गर्द ही गर्द नजर आई। धोरों की नैसर्गिक सुंदरता खिल आई है। रेत के धोरों पर से तमाम अस्वच्छता गायब हो गई है। रेत की ऊपरी चादर उड़कर कहीं दूर जाने के बाद अब जो रेत है वह एकदम स्वर्णिम आभा देने लगी है, जैसे जमीन पर सोने की परत बिछी हो। हवा के कारण रेत के 'कट' लहरिया हो गए है। यहां शाम जब लालिमा लाती है तो ये मुलायम धोरे अलग ही नजर आते हैं। आंधियों के इस दौर और बारिश से पहले ही यह नजारा कुछ दिनों के लिए होगा, फिर बारिश होते ही धोरे कठोर हो जाएंगे और ये सोनाळा (सोने सा) रंग नजर नहीं आएगा। सीमावर्ती रोहिड़ी गांव से पत्रिका फोटोजर्नलिस्ट ओम माली ने इस दृश्य को अपने कैमरे में कैद किया।

गौरतलब है कि थार में पिछले सात दिनों से थार में चल रही तेज आंधी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लगातार धूल-मिट्टी के माहौल से हर कोई त्रस्त है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ज्यादा खराब हो गए हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक धूल हटाने का काम शुरू नहीं किया गया है। ऐसे में कई गांवों से आवाजाही बंद है।


सीमावर्ती क्षेत्र में सड़कों पर रेत के धोरों की चादर बिछ चुकी है। जिससे आवागमन के साधन निकल नहीं पा रहे हैं। आंधी के कारण बिजली व पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रभावित हुई है।


चारे के वाहन रेत में फंसे
सबसे ज्यादा परेशानी पशुधन को लेकर है। जिनके लिए चारे पानी का प्रबंध करना पशु पालकों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। पशु शिविरों के लिए पहुंचने वाली चारे की गाडिय़ां नहीं पहुंच पा रही है। सड़क पर रेत जमा होने से वाहन बीच रास्ते में फंस गए हैं।


बिजली-पानी का संकट
आंधी के कारण बिजली सप्लाई बंद है। ऐसे में पानी की आपूर्ति भी नहीं हो रही है। पूरे क्षेत्र में बिजली-पानी को लेकर भयंकर संकट उत्पन्न हो गया है।


रेत हटाने के नहीं इंतजाम
सीमावर्ती तहसील गडरारोड को जोडऩे वाले अधिकांश मार्ग धूल से अवरुद्ध हो चुके हैं। अभी तक प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली है। रेत हटाने का काम शुरू नहीं होने से ग्रामीण अपने स्तर पर समस्या का समाधान करने में जुटे हैं।


इन गांवों का रास्ता हो गया बंद
गडरारोड़ से जाने वाले कई गांवों का रास्ता बंद हो चुका है। इसमें गडरारोड़ से बिजावल, समन्द का पार, रतरेड़ी कलां, मुनाबाव से रोहिड़ी, सुंदरा, म्याजलार, सालमसिंह की बस्ती, रावतसर, चेतरोड़ी, लांबड़ा, उतरबा सहित कई गांवों के रास्ते में धूल जमा हो जाने से आवाजाही बंद हो गई है।