
जन्म से पहले पिता का उठा साया, दादा ने बताई शिक्षा की महत्ता, पहले प्रयास में बनी शि क्षिका
दिलीप दवे
बाड़मेर. जिस बच्ची के जन्म से
पहले ही पिता का साया उठ गया और एक साल बाद मां का भी साथ छूट गया। गरीबी के बीच बिना माता-पिता की संतान को दादा-दादी ने पाला और शिक्षा की महत्ता बताते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आज वह बालिका शि क्षिका के रूप में चयनित होकर गांव वालों के लिए मिसाल बन गई है। तृतीय श्रेणी अध्यापक में चयनित हुई डूडियों की ढाणी निवासी हीरो मेगवाल ने सामान्य श्रेणी से वरीयता प्राप्त कर शिक्षक की नौकरी प्राप्त की है।
रावतसर निवासी हीरोंदेवी मेघवाल पर बचपन से ही दुखों का पहाड़ टूट गया। उसके जन्म से दो माह पहले पिता क साया उठ गया। एक साल बाद मां ने उसको दादा-दादी के भरोसे छोड़ दिया। मजदूरी व खेती बाड़ी करने वाले दादा भूराराम व पेंपोदेवी ने हीरोंदेवी व उसकी बहन का लालन-पोषण करने के साथ शिक्षा का महत्व समझाते हुए पढ़ने भेजा। बड़ी बहन ने बारहवीं उत्तीर्ण की तो हीरोंदेवी भी पढ़ने में मन ल गाने लगी। उसने बारहवीं तक की शिक्षा रावतसर के सरकारी विद्यालयों में की। इसके बाद बीएसटीसी की तैयारी में जुट गई। पहले प्रयास में सफलता हाथ नहीं लगी तो थोड़ी निराश हुई पर हिम्मत नहीं हारी। दूसरे प्रयास में उसका चयन हुआ और जैसलमेर से बीएसटीसी 2017 से 19 तक की। बीएसटीसी करने के बाद वे बाड़मेर आ गई और कोचिंग कर तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती की तैयारी करने लगी। उनकी मेहनत व हिम्मत पर पहले ही प्रयास में चयन हो गया। उन्होंने 134 अंक प्राप्त कर 2817 वरीयता हासिल की और सामान्य श्रेणी में चयन हुआ। चाचा नवलाराम मजदूरी करके उसको पढ़ाने में सहयोग दे रहे हैं।
प्रतिदिन दस घंटे की पढ़ाई--हीरोँ ने बताया कि उसने अपने दादा का सपना पूरा करने के लिए रोजाना दस घंटे पढ़ाई की। उसके अनुसार उनके समाज में अभी तक पढ़ाई कम है लेकिन मेरा चयन होने से समाज में अच्छा मैसेज जाएगा और बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। उसके अनुसार बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई लालटेन की रोशनी में की है।
मिसाल पेश की- हीरों ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सफलता हासिल की है। इससे समाज व अन्य वर्गों के विद्यार्थियों का हौसला बढेगा।- डालू जाखड़,रावतसर
Published on:
20 Apr 2022 09:09 pm
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