ललित महीनों बाद मुस्कराया...आंखों में छलका उम्मीद का पानी

जिंदगी को जब आस जगती है तो वो कितनी मीठी मुस्कराती है...यह दृश्य सोमवार की सुबह सामने था। महीनों से बिस्तर पर लेटा एक युवक महंगा इलाज नहीं मिलने की वजह से जीवन की आस को छोड़कर पल-पल सामने छा रहे अंधेरे में घुटा जा रहा था और अपने बड़े भाई की मौत को करीब से इसी रोग से देखने वाले इस युवक मुस्कराना तो शायद लंबे समय से भूल ही गया था।

By: Ratan Singh Dave

Published: 23 Feb 2021, 12:37 PM IST

ललित महीनों बाद मुस्कराया...आंखों में छलका उम्मीद का पानी
पत्रिका अभियान- आओ मिलकर बचाएं एक युवक की जिंदगी
बाड़मेर.
जिंदगी को जब आस जगती है तो वो कितनी मीठी मुस्कराती है...यह दृश्य सोमवार की सुबह सामने था। महीनों से बिस्तर पर लेटा एक युवक महंगा इलाज नहीं मिलने की वजह से जीवन की आस को छोड़कर पल-पल सामने छा रहे अंधेरे में घुटा जा रहा था और अपने बड़े भाई की मौत को करीब से इसी रोग से देखने वाले इस युवक मुस्कराना तो शायद लंबे समय से भूल ही गया था। परिजन भी निराश और आने वालों के पास भी हताशा के अलावा कुछ नहीं लेकिन सोमवार को जब इसी युवक को उपचार के लिए दिल्ली ले जाने के लिए ऑक्सीजन मास्क उतारकर कार में बैठाया गया तो ऐसी मुस्कान बिखेरी कि लगा जिंदगी यों मुस्कराती है। ललित की महीनों बाद आई इस मुस्कान ने मौजूद लोगों की आंखों मेे पानी ला दिया..। ललित के लिए अटूट प्रार्थनाएं कर रहे थे और जिंदगी की उम्मीद लिए ललित एम्स दिल्ली में उपचार को रवाना हुआ।
तनसिंह सर्किल के पास रहने वाले चंपालाल जसमतिया का 22 वर्षीय बड़ा बेटा दिग्विजय दुर्लभ पोम्पेरोग का पता लगने से पहले चल बसा। छोटे 19 वर्षीय बेटे में यही लक्षण दिखे तो सामने आया कि पोम्पेरोग है और इसके लिए 2.75 करोड़ रुपए का उपचार होगा। परिवार की आस और उम्मीद महंगे उपचार ने तोड़ दी। ललित दस माह से घर के बिस्तर पर है । ऑक्सीजन दिन में 8 से 10 घंटे लगाने की नौबत और कमजोर होती मांसपेशियों से चलना फिरना मुश्किल। परिजनों की टूटती उम्मीद में राजस्थान पत्रिका तक दर्द पहुंचा। पत्रिका ने सुनो सरकार...एक युवक की जिंदगी को बस आपसे आस से शुरू की समाचार श्रृंखला में सरकारी व आम आदमी से मदद का सिलसिला शुरू किया तो हजारों लोग इस मुहिम से जुड़ गए। ललित के लिए लगातार आर्थिक मदद उसके एकाउंट में की जा रही है। रविवार को केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री एवं सांसद कैलाश चौधरी ने पत्रिका की मुहिम बाद ललित के दिल्ली एम्स में जांच व उपचार की जिम्मेवारी ली।
प्रार्थनाओं के साथ विदाई
ललित को सोमवार सुबह दिल्ली के लिए रवाना करने से पहले ऑक्सीजन मास्क उतारे। परिवार के सदस्यों ने देवी-देवताओं के हाथ जोड़े और प्रार्थना की कि वह दिल्ली से स्वस्थ होकर लौटे। ललित को भी दुआओं की माला पहनाई गई। कार में लाकर ललित को बैठाया गया। ललित के चेहरे पर यकायक मुस्कान बिखर पड़ी। परिजनों के आंखों में पानी छलकते देर नहीं लगी। मां प्रतिभा सोनी ने महीनों बाद अपने बेटे के चेहरे पर यह खिली मुस्कान देखी थी। उसकी आंखों के आंसू टपकने लगे तो पास खड़ी सभी महिलाओं के आंखें भीग चुकी थी, वे अपने घूंघट से आंसूओं को पौंछने का जतन कर रही थी। यहां पहुंचे ललित के परिजनों और समाज के लोगोंं के लिए भी यह क्षण भाव व्हिल था। सभी ने ललित के सिर पर हाथ फेरते हुए यही कहा कि ठीक होकर आओगे। ललित ने पूरे ढाढस का यह शब्द भी महीनों बाद सुना था। अब तक उसको यही सुनाई पड़ रहा था कि इलाज बहुत महंगा है और अब क्या करें? पहली बार उसको जिंदगी की आस जगाने वाले शब्द कानों में सुनने को मिले तो उसके चेहरे पर जीने का भाव दमकने लगा था।
दिल्ली में आज से उपचार
केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने बताया कि ललित के दिल्ली पहुंचने से पहले ही केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से बात कर उसके जांच व उपचार के लिए प्रबंध कर लिया है। मंगलवार को ललित को दिल्ली एम्स में दाखिल करवाकर उपचार प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार से ललित की पूर्ण मदद के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।

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