बाड़मेर

मां निरमा बार-बार बोलती रही…यहीं कहीं होगी मेरी बेटी, ढूंढ़ कर लाओ कोई

दो माताओं की गोद से दूर हुए तीन मासूम- खेलने के लिए घर से निकले, क्षत विक्षत जले हुए कपड़े में शव आंगन में लाए - मां की चित्कार, पिता के रुंधे गले और बहते आंसुओं ने हर किसी को झकझोरा

2 min read
मां निरमा बार-बार बोलती रही...यहीं कहीं होगी मेरी बेटी, ढूंढ़ कर लाओ कोई

बायतु मीठड़ा गांव की निवासी सायर कंवर के पति हिंगोलसिंह की करीब डेढ़ साल पूर्व मौत हो गई थी। सायर कंवर के ऊपर दो बेटों व चार बेटियों के पालन पोषण की जिम्मेदारी आ गई, जिसे वह निभा भी रही थी।इन दिनों वह अपने पांच बच्चों के साथ अपने जेठ रिड़मलसिंह के घर बांदरा में परिवार से मिलने के लिए आई हुई थी। वहीं उसका एक बेटा जुझारसिंह अपने ननिहाल ढोंक चौहटन गया था। बुधवार दोपहर बाद घर में लगी आग में दो बच्चे रुखमों व अशोक जिंदा जल गए। इस घटना के बाद उसका एक बेटा व तीन बेटियां बची है।

मासूम बेटी का चेहरा भी नहीं देख पाया बेबस पिता

सांसियों की बस्ती बांदरा निवासी हाकमसिंह हमेशा की तरह अपनी दोनों बेटियों सरूपी व ज्योति को लाड़ प्यार से दुलार कर मजदूरी के लिए उत्तरलाई गया था, लेकिन उसको क्या पता कि आने के बाद अपनी चार वर्षीय पुत्री सरूपी का ढंग से चेहरा भी नहीं देख पाएगा। सरूपी की मां निरमा का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा है। बड़ी बेटी की इस हादसे में मौत के बाद एक छोटी बेटी ज्योति बची है। उसके पिता हाकमसिंह का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा है। पूछने पर रुंधे गले से बताया कि बच्चे हमेशा ही खेलते हैं लेकिन उनकी मासूमियत से ही जान पर बन आई। वह दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का गुजारा करता है लेकिन आज का दिन उसके लिए ऐसा आएगा, यह कभी नहीं सोचा था। उसकी दोनों बेटियों उसके लिए बेटे से बढ़कर थी। सरूपी की मां निरमा रोते हुए कह रही थी कि उसकी बेटी सरूपी यहीं कहीं होगी, ढूंढ कर लाओ। वह उससे दूर नहीं जा सकती।

कल तक खुशियां, आज मातम

रिड़मलसिंह के घर पर कल तक खुशियां ही खुशियां थी। भाई हिंगोलसिंह के बच्चे व अपने पोते पोतिया हंसी खुशी से खेल रहे थे लेकिन खेल खेल के दौरान अचानक एक घटना से चंद मिनटों में ही लगी आग में पूरे परिवार की खुशियां जलकर भस्म हो गई। हालांकि आंगन में खड़े दूसरे बच्चे इस पूरी घटना से अनजान नजर आए।

Published on:
09 Feb 2023 01:59 pm
Also Read
View All

अगली खबर