
पांच करोड़ में बन जाते ओपनवैल, समस्या होती हल, तीन करोड़ का डीजल जल गया और स्थिति जस की तस, पढि़ए पूरा समाचार
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पत्रिका एक्सक्लुसिव
दिलीप दवे
बाड़मेर पत्रिका.
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ)के जवान प्रतिदिन थार के रेगिस्तान और पश्चिमी सीमा पर पानी की जंग लड़ रहे हैं और जलदाय महकमा बीएसएफ से दो साल पहले करीब पांच करोड़ रुपए लेने के बावजूद नौ करोड़ की योजना को पूरा नहीं कर पाया है। कुछ जगह काम हुए हैं पर वो भी अधूरे। सीमा सुरक्षा को तैनात करीब 1000 जवान पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं। बीएसएफ मजबूरन प्रतिदिन टैंकरों से सीमांत चौकियों तक पानी पहुंचा रही है जिस पर इन दो साल में लगभग तीन करोड़ का डीजल फुं़क गया है।
बाड़मेर जिले की 233 किमी की सीमा पर बीएसएफ की चार बटालियन और 62 चौकियां हैं। इसमें से 28 चौकियां दुरूह और पेयजल की गंभीर किल्लत वाली हैं। यहां पानी के प्रबंध को लेकर करीब नौ करोड़ की योजना बनाई गई। बीएसएफ ने करीब दो साल पहले लगभग पांच करोड़ रुपए जमा करवा दिए पर जलदाय विभाग की गैरजिम्मेदारी और लेटलतीफी के चलते अभी तक चौकियों तक पूरे कनेक्शन ही नहीं दिए गए हैं।
तीन करोड़ का डीजल जला
बीएसएफ की चौकियों तक पानी पहुंचाने को टैंकर लगे हुए हैं। जलदाय विभाग के ही प्वाइंट से ये पानी भरकर बॉर्डर तक जाते हैं। इस पर प्रत्येक बटालियन से हर माह करीब तीन से चार लाख डीजल के व्यय हो रहे हैं। दो साल में चारों बटालियन के करीब तीन करोड़ रुपए इस पर व्यय होने का अनुमान है।
आरओ प्लांट भी नहीं लगाए- बीएसएफ की ओर से यहां आरओ प्लांट लगाने का प्रस्ताव भी भेजा गया है ताकि जवानों को मीठा पानी उपलब्ध हो सके लेकिन अभी तक आरओ प्लांट का भी इंतजार है।
अभी ज्वाइन किया है
मैंने राइजेप के अधिशासी अभियंता पद का हाल ही में पदभार संभाला है। फाइल देखने पर ही पता चल पाएगा कि क्या स्थिति है।- संजय जैन, अधिशासी अभियंता, राइजेप खण्ड बाड़मेर
Published on:
10 Aug 2018 06:17 pm
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