बच्चों की सेहत पर फोकस, खांसी-जुकाम तो कोविड जांच

-ओपीडी में संदिग्ध लक्षण मिलने पर करवाई जा रही जांच
-लक्षण नजर आने पर रिपोर्ट मिलने तक आइसोलेशन में
-अभी काफी कम है बच्चों के बीमार होने के मामले

By: Mahendra Trivedi

Published: 28 May 2021, 09:18 PM IST

बाड़मेर. कोविड-19 की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच बच्चों की सेहत को लेकर काफी फोकस किया जा रहा है। चिकित्सा विभाग बच्चों के बीमार होने पर उसकी सेहत को लेकर फिक्रमंद हो गया है और ओपीडी में आने वाले बच्चों में कहीं खांसी-जुकाम और बुखार है तो उसे कोविड संदिग्ध की श्रेणी में मानते हुए आरटीपीसीआर जांच करवाई जा रही है। जिससे समय रहते बच्चों में कोविड होने का पता चल सके।
जिला अस्पताल की बच्चों की ओपीडी में चिकित्सक खांसी-जुकाम होने पर कोविड जांच की सलाह दे रहे हैं। वहीं बच्चों में इसके मामूली लक्षण दिखने पर अस्पताल में ही आइसोलेशन में रखा जा रहा है। वहीं पॉजिटिव आने पर बच्चे को भर्ती करते हुए उसकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालांकि अभी अस्पताल में आने वाले संदिग्ध मामले काफी कम है। लेकिन खांसी-जुकाम के बच्चे ओपीडी में आ रहे हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर जोर
शिशुरोग विशेषज्ञ बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रह हैं। उनका कहना है कि बच्चा कमजोर होगा तो जल्दी चपेट में आने की आशंका रहती है। इसलिए इम्युनिटी जितनी बेहतर होगी, बीमार होने का खतरा उतना ही कम होगा। इसलिए बच्चे के खाने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत इन दिनों में और बढ़ गई है।
डॉक्टर की सलाह...
बच्चों की सेहत को लेकर हमेशा अलर्ट रहे। महामारी के दौर में और अधिक सावधानी बरती जरूरी है। बुखार-खांसी और जुकाम है तो जल्द से चिकित्सक को दिखाएं। परामर्श के अनुसार दवाएं दें। बच्चों को मास्क पहनाएं और हाथ धोने के बारे में बार-बार बताते रहें। जागरूकता और गाइडलाइन को अपनाकर काफी हद तक बच्चों का कोरोना से बचाव कर सकते हैं। ओपीडी में आने वाले बच्चों की संदिग्ध लक्षण नजर आने पर कोविड जांच करवाई जा रही है। हालांकि अभी ऐसे बच्चों की संख्या बहुत ही कम है।
डॉ. हरीश चौहान, एसोसिएट प्रोफेसर, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ, राजकीय अस्पताल बाड़मेर

Mahendra Trivedi
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