इस अवसर पर बोलते हुए कुलपति ने कहा कि यह एक अच्छा प्रयास है, युवाओं को उद्यमशील बनाने के लिए इस पुस्तिका के माध्यम से बहुत सारी जानकारी उपलब्ध हो जाएगी। साथ ही प्रवासी कामगारों को फायदा मिलेगा। इस अवसर पर निदेशक, प्रसार शिक्षा निदेशालय, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर डॉ. ईश्वर सिंह ने कहा कि इस तरह की पुस्तिका से युवाओं को विभिन्न प्रकार के उद्यम जैसे नर्सरी प्रबंधन, मुर्गीपालन, मूल्य संवद्र्धन आदि की जानकारी मिल सकेगी। कृषि विज्ञान केन्द्र, गुड़ामालानी के प्रभारी डॉ. प्रदीप पगारिया ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 6 राज्यों के 116 जिलों में 125 दिनों तक प्रवासी श्रमिकों की सहायता के लिए मिशन मोड में चलाया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य लॉकडाउन के दौरान अन्य राज्यों या जिलों से आए प्रवासी मजदूर जो बेरोजगार हो गए हैं उन्हें कौशल प्रशिक्षण से अपने गृह जिले में ही रोजगार के उत्तम अवसर प्रदान करना है।