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स्कूल में दो कक्ष, एक में कबाड़, दूसरे में क्लास, सात कक्षाएं आसमान तले

- एक कमरे में आठवीं का स्कूल- क्षेत्र के लीकड़ी उप्रावि का मामला

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in a room Upper primary school

in a room Upper primary school

शिव. शिक्षा विभाग ने बच्चों के प्रवेश को लेकर प्रवेशोत्सव पर तो खूब बल दिया, लेकिन विद्यार्थियों के बैठने व अध्ययन के लिए कक्षा कक्षों का ठिकाना नहीं है। ग्राम पंचायत बालासर के लीकड़ी में दो कमरों में ही उच्च प्राथमिक विद्यालय का संचालन हो रहा है। ऐसे में यहां अधिकांश कक्षाएं पेड़ों के नीचे या आसमान तले ही संचालित हो रही हैं।

यह विद्यालय 1992 में 40 विद्यार्थियों के साथ प्राथमिक विद्यालय से शुरू हुआ। उस दरमियान भवन के लिए दो कक्षा कक्ष स्वीकृत हुए। इसके बाद विद्यालय उच्च प्राथमिक में क्रमोन्नत हो गया, लेकिन कोई भवन नहीं बना।

ऐसे में वर्तमान में यहां करीबन 10 कक्षों की आवश्यकता है, लेकिन अभी दो कक्षा कक्ष ही उपलब्ध है। इसमें भी एक कक्ष में पुराना सामान रखने व स्टोर के रूप में काम में लिया जा रहा है। वहीं एक कक्ष विद्यार्थियों के बैठने के लिए बचा है। ऐसे में अन्य 7 कक्षाएं प्रतिदिन आसमां तले ही लगती हैं। आगामी सर्द ऋतु में भी विद्यार्थियों को बाहर ही बैठना होगा।

- नहीं बने कक्ष

अधिकांश कक्षाएं पेड़ों की छाया में चलती हैं। विद्यालय उच्च प्राथमिक में क्रमोन्नत होने के बाद कक्षा-कक्षों का निर्माण नहीं हुआ।

- कुंजीलाल मीना, कार्यवाहक प्रधानाध्यापक

-बाहर बैठते हैं विद्यार्थी

विद्यालय में 8 कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन कक्षा-कक्ष मात्र दो ही हैं। ऐसे में सर्दी, बारिश व गर्मी के दौरान भी बच्चों को बाहर ही बैठना पड़ता है।

- हिंदूसिंह, ग्रामीण लीकड़ी

- ऑनलाइन होता है काम

प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए कुछ माह पूर्व एफएफसी योजना के माध्यम से ग्राम पंचायतों को निर्माण के निर्देश जारी हुए हैं। साथ ही प्रतिवर्ष प्रत्येक विद्यालय के लिए यू डाइस बुकलेट भरवाई जाती है। इसमें कक्षा कक्षों का ब्योरा ऑनलाइन दर्शाया जाता है। उसके अनुरूप ही स्वीकृति जारी होती है।

-गुलाराम, कनिष्ठ अभियंता सीबीईओ कार्यालय शिव