
बाड़मेर में जैन संतों का स्वागत करते श्रद्धालु।
बाड़मेर. जैन संत विवेकसागर , प्रशमसागर, मैत्रीवर्धनसागर. जीतवर्धनसागर ने चातुर्मास को लेकर बुधवार को बाड़मेर नगर प्रवेश किया। उनका श्रद्धालुओं ने जगह-जगह स्वागत किया।शोभायात्रा के दौरान श्री कुशल विचक्षण जैन धार्मिक पाठशाला के बच्चों ने पिरामिड बना संतों की वंदना की। जिनशासन युवती मंच ने नवकार मंत्र एवं कांति सुलोचन सामायिक मंडल ने अष्टमंगल की प्रस्तुतियां दी। चुनरी का साफा बांधे बालिकाएं एवं पुरुष जयकारे लगाते हुए शोभायात्रा में शामिल हुए। शोभायात्रा महावीर स्वामी जिनालय जूना केराडू मार्ग से प्रारम्भ होकर चिंदड़ियों की जाल, करमूजी की गली, दरियागंज, प्रतापजी की पोल होते हुए चातुर्मास स्थल जिनकांतिसागरसूरि आराधना भवन पहुंची, जहां पर धर्मसभा का आयोजन किया गया।
मुनि विवेकसागर ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि काल बड़ा ही विकराल है। समय सतत अपनी गति से चल रहा है। हमारा रहने का तरीका जरूर बदला है लेकिन हमारा नैतिक एवं धार्मिक स्टण्डर्ड अभी तक वहीं का वही है।
मुनि प्रशमसागर ने कहा कि चातुर्मास जीवन का आमूलचूल परिवर्तन करने का पर्व है। साध्वी विद्युतप्रभा ने कहा कि बाड़मेर की धरती आचार्य जिनकांतिसागरसूरि की कर्मभूमि और प्रमोदश्री की अंतिम साधना भूमि है। बी.डी. तातेड़, रिखबदास, डॉ. रणजीतमल मेहता, मुकेश जैन, वीरचंद भंसाली, जितेन्द्र बांठिया, कांति सुलोचन सामायिक मंडल, सोनू वडेरा, ज्योति मालू, हर्षा कोटड़िया, आदिनाथ महिला मंडल, खरतरगच्छ महिला परिषद, जिनशासन युवति मंच ने विचार व्यक्त किए।
आराधना भवन के शिखर पर ध्वजारोहण करने का लाभ मुनि मैत्रीवर्धनसागर के संसारिक पिता संतोष लोढ़ा व माता ललितादेवी लोढ़ा ने लिया। अतिथियों का तिलक, माला, साफा, श्रीफल से स्वागत किया गया। संचालन सोहनलाल संखलेचा ‘अरटी’ ने किया।
Published on:
06 Jul 2022 09:41 pm
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