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थार में महिला सशक्तीकरण की मिसाल बनी जेठी और जेहनी

कृषि में नवाचार को लेकर मिल चुका पुरस्कार, पुरुष किसान भी ले रहे प्रेरणा -महिला कृषक दिवस विशेष

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थार में महिला सशक्तीकरण की मिसाल बनी जेठी और जेहनी

थार में महिला सशक्तीकरण की मिसाल बनी जेठी और जेहनी

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बाड़मेर. थार में महिला सशक्तीकरण की ज्योत अब चहुंओर नजर आ रही है। सरकारी नौकरियों में थार की महिलाओं की तादाद बढ़ रही है तो दूसरी ओर हस्तशिल्प, कला और उद्योग में भी महिलाएं लगातार प्रगति कर रही हैं। इसी कड़ी में अब कृषि में भी थार की महिलाएं अलग छाप छोड़ रही हैं। इसकी मिसाल है सिवाना की जेठीदेवी और जेहनी देवी। जेठीदेवी ने कृषि में नवाचार कर पॉली हाउस लगा परिवार के साथ किसानों को नवीन तकनीक से रुबरु करवाया तो जेहनी देवी आधुनिक पशुपालन पद्धति अपनाने के साथ खेती बाड़ी कर रही है।

थार में वैसे तो कृषि कार्य में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा है, लेकिन आज भी नवीन तकनीक अपनाने के साथ नवाचार को लेकर पुरुष किसान ही आगे आते हैं। एेसे में सिवाना की एक महिला ने सोचा कि क्यों न उसके नाम से ही नवाचार शुरू किया जाए। उसने कृषि विज्ञान केन्द्र में संपर्क किया तो उसकी हिम्मत और उत्साह देख कृषि वैज्ञानिकों ने पॉली हाउस लगाने की सलाह दी। बैंक ऋण के साथ कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से कार्य शुरू किया और कुछ माह में ही लाखों कमा लिए। उसकी मेहनत व हिम्मत को देख आसपास के किसान भी प्रोत्साहित हुए और गुड़ामालानी क्षेत्र में भी पॉली हाउस लगे। जेठीदेवी के काम को सरकार ने भी सराहा और पिछले साल उन्हें आत्मा योजनान्तर्गत कृषि में नवाचार को लेकर जिला स्तर पर प्रथम पुरस्कार के रूप में पच्चीस हजार रुपए मिले।

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उन्नत पशुपालन की मिसाल

धांधलावास गांव की जेहनी देवी परम्परागत खेती के साथ एक-दो पशु पाल कर परिवार को आर्थिक संबंल दे रही थी। इस दौरान गांव में कार्यशाला हुई तो वह भी उसमें चली गई। यहां पता चला कि उन्नत नस्ल के पशु पाल कर अच्छी कमाई हो सकती है। इसके बाद उसने सलाह लेकर पशुपालन व खेती में नवीन प्रयोग को लेकर कार्य आरम्भ किया। आज वह लाखों कमा रही है।

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नोजीदेवी ने छोड़ी परम्परागत खेती, अपनी वाड़ी

गुड़ामालानी की नोजीदेवी पहले परम्परागत खेती करती थी। उसने वैज्ञानिकों की सलाह पर इसकी जगह वाड़ी लगाई। पहले तीन माह में ही उसे एक लाख की कमाई हुई। अब उसे सालाना तीन-चार लाख की आय हो रही है।

महिला कृषकों की बढ़ रही तादाद

जिले में वैसे भी महिलाएं ही खेतीबाड़ी का काम संभालती हैं। सुबह घर का काम निपटा खेतीबाड़ी करती है। अब नवाचार के बाद महिलाओं में जागरूकता आई है। दिनोंदिन महिला कृषकों की तादाद बढ़ रही है। - डॉ. प्रदीप पगारिया, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र, गुड़ामालानी