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थार में ‘कडक़नाथ’ की ‘कुकडू कू   ’ दे रही कमाई

- मुर्गीपालन में युवा दिखा रहे रुचि, सैकड़ों ने लिया प्रशिक्षण

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थार में ‘कडक़नाथ’ की ‘कुकडू कू   ’ दे रही कमाई

थार में ‘कडक़नाथ’ की ‘कुकडू कू   ’ दे रही कमाई

दिलीप दवे बाड़मेर. थार में युवा अब मुर्गीपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने को लेकर रुचि दिखा रहे हैं। कृषि के साथ कम खर्च में रोजगार शुरू होने पर कई युवाओं ने इसको अपनाया है।

हालांकि अभी तक वृहद स्तर पर तो आठ-दस युवाओं ने ही मुर्गीपालन केन्द्र खोले हैं लेकिन सैकड़ों घरों में मुर्गियां पाली जा रही है जिससे छोटी-मोटी कमाई युवा कर रहे हैं। एेसे में यहां कडक़नाथ, प्रतापजन, असील जैसी प्रजातियों की मुर्गियां पाल कर युवा अण्डे, चूजे व मुर्गे-मुर्गियां बेच कमाई कर रहे हैं। स्थिति यह है कि अण्डों की स्थानीय बाजार में बेहद मांग पर हाथोंहाथ बिकवाली भी हो रही है। कृषि प्रधान जिले बाड़मेर में अब कृषि से जुड़े व्यवसाय भी अपनाए जाने लगे हैं जिसमें से मुर्गीपालन भी एक है।

जिले में मुर्गीपालन को व्यवसायिक रूप देते हुए केवीके दांता की ओर से २०१७ में पहली बार युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद प्रशिक्षण शिविर लगातार आयोजित हो रहे हैं जिसके चलते आज जिले में करीब पन्द्रह सौ-दो हजार युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इनमें से सैकड़ों ने छोटे स्तर पर मुर्गीपालन शुरू किया है जिसके तहत उनके पास पच्चीस से पचास मुर्गियां हैं जिनके अण्डे बेच वे छोटी-मोटी कमाई कर रहे हैं।

दस बड़े फार्म, दे रहे अच्छी कमाई- जिन युवाओं को केवीके ने प्रशिक्षण दिया उनमें से दस जनों ने मुर्गी फार्म खोले हैं। जानकारी के अनुसार दानजी की होदी बाड़मेर, गेहूं, देरासर, आकड़ली, देशांतरी नाडी,नगर सहित दस जगह फार्म में हजार से दो हजार तक मुर्गियां है जिसमें कडक़नाथ ज्यादा है तो अन्य में प्रतापजन, असील भी है।

डेढ़ लाख से कार्य शुरू, अंडे की बेहद मांग- मुर्गीपालन व्यवसाय सवा लाख रुपए में आसानी से शुरू हो जाता है। दो-ढाई सौ मुर्गियों के साथ यह शुरू किया जा सकता है। मुर्गी चौबीस घंटे में एक अंडा देती है। बाड़मेर के बाजार में देसी अंडा पचास रुपए में बिक जाता है और इसकी मांग ज्यादा है। मुॢगयों के दाने, खाने, मुर्गीघर आदि का खर्चा निकाल कर भी करीब पचास फीसदी मुनाफा रह जाता है जिस पर यह व्यवसाय फायदे का सौदा साबित हो रहा है।

मुर्गी व चूजों की भी मांग- अंडों के अलावा मांस के रूप में भी मुर्गी, मुर्गों व चूजों की मांग रहती है। इससे मुर्गीपालक को बढि़या आमदनी हो जाती है। वहीं, मुर्गीपालन में ज्यादा खर्चा नहीं होने से भी यह फायदे का व्यवसाय है।

युवा दिखा रहे रुचि- मुर्गीपालन में युवा रुचि दिखा रहे हैं। हालांकि वृहद स्तर पर बड़े मुर्गी फार्म जिले में कम है लेकिन आने वाले दिनों में बढऩे की उम्मीद है। हमने सैकड़ों युवाओं को प्रशिक्षण दिया है। जिले में सैकड़ों युवाओं ने पच्चीस से पचास मुर्गियों का पालन कर छोटा व्यवसाय कर रखा है।-डॉ. बी एल डांगी, पशुपालन विशेषज्ञ केवीके दांता