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कानाफूसी: अरे,ये क्या हो गया.. हटाओ तुरंत,जानिए पूरा मामला

कानाफूसी

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kanafoosee: Hey, what happened? Remove immediately

बाड़मेर.महिला डिप्टी आई नहीं पर असर छोड़ गई
रात को खबर चली कि जैसलमेर पुलिस के कांग्रेस के एक बड़े नेता की बेटी को बालोतरा डिप्टी लगा दिया। भले ही डिप्टी थी लेकिन नेताजी की पुत्री के रूप में सोशल मीडिया में एेसा रंग जमा कि बधाइयों का तांता लग गया। खबर के तो पंख होते है और उड़ते ही पहुंच गई विधायक और मंत्रीजी के पास। साहब, ये क्या हो गया? आपके राज में कांग्रेसी नेता की बेटी आ गई और आपको पता भी नहीं चला। फिर क्या था, नेताजी ने जो है सो है..तुरंत ही कहना शुरू कर दिया ये क्या कर दिया? क्यों हमारी राजनीति खटाई में डालना चाह रहे हों। पुलिस के जोधपुर के बड़े अफसर के सामने इतना बड़ा चिट्ठा पढ़ा कि कांग्रेसी नेता की बेटी का आदेश संसोधित हो गया। बधाई देने वालों को बोल वापिस लेने पड़े और मंत्रीजी की सांस में सांस आई।

साहब के नहीं पहुंचने पर मंत्रीजी सबकुछ कह गए
बीते दिनों यहां आए केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत को उनके कार्यक्रम में बड़े साहब नहीं पहुंचे। मंत्रीजी को बात अखर गई। उन्होंने फिर क्या तंज कसे है कि पब्लिक को लगा कि मंत्रीजी को गहरी लगी है। मंत्री ने कहा कि इनको पता नहीं छात्रों से क्या परेशानी होती है। अध्यक्षता के नाते नहीं आए तो केाई बात नहीं जब भी आए तो मेरी तरफ से धन्यवाद देना। मंत्रीजी ने यहां तक इशारा किया कि उनके नहीं आने का कारण भी मुझे पता है।

घर के ही नहीं साथ तो क्या करे
सभापति के लिए इन दिनों घर के पार्षद ही सिरदर्द बने हुए है। बीते दिनों हुई बैठक में घर के विधायकों ने एेसा घेरा कि वे कुछ नहीं कह पाए। माईक छीन लिया, आंखें तरेरी और इतना सुनाया कि विपक्ष को तो बोलने की जरुरत ही नहीं रही। पार्षद विधायक के खास है और सभापति की खाल उतारने में लगे हुए है। अब राजनीति पता नहीं लेकिन सदन में एेसे लगता है सभापति को घरवालों ने घेरने की पूरी तैयारी कर रखी है।

साहब इतने जम गए है कि अब सब नजरें जमाए है
यहां कलेक्टरी में एक साहब एेसे जमे है जैसे दही। उनकी और बड़े साहब की पटरी भी खास नहीं बैठ रही है।एेसे में कई मामलों में इनको किनारे पर ही रखा जा रहा है। फिर भी अपनी दाल गलाने के कोई अवसर ये साहब नहीं छोड़ते है। सूबे में सर्वाधिक समय एक स्थान बीताने वालों में शामिल हो चुके साहब को अभी भी एेतबार है कि अभी कहीं नहीं जाना है।