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जानिए अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप की इस घोषणा का बाड़मेर में क्या हो रहा असर

1.84 लाख मीट्रिक टन जीरा जाता है अमरीका.. बाड़मेर से 50 फीसदी हैण्डीक्राफ्ट को लेकर दीपक शारदा बताते हैं कि अमरीका की ओर से 26 प्रतिशत कर लगता है तो इससे उत्पाद महंगा हो जाएगा। अभी यूरोप और अमरीका दो बड़े खरीदार है। हैण्डीक्राफ्ट में भी जो लकड़ी के उत्पाद है उनके कारखाने जोधपुर है। […]

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1.84 लाख मीट्रिक टन जीरा जाता है अमरीका.. बाड़मेर से 50 फीसदी

  • अमरीका के 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने पर बाड़मेर में भी बाजार पर होगा असर-
  • कृषि उत्पादों पर पड़ेगा असर, हैण्डीक्राफ्ट भी नहीं रहेगा अछूताबाड़मेर. अमरीका में भारत से आयात होने वाले सामान पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने से सीमावर्ती बाड़मेर जिले में कृषि उत्पादों के निर्यात पर असर पड़ेगा। वहीं हैण्डीक्राफ्ट से जुड़े हुए व्यवसायी ऊहापोह में है। 26 प्रतिशत टैरिफ लगने से व्यापारियों को उत्पाद की कीमतों को बढ़ाना होगा। इससे मांग कम होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इस झटके से टैक्सटाइल्स, हैण्डीक्राफ्ट और कृषि तीन क्षेत्रों के लोग चिंता में है।अमरीका को राजस्थान से 1.84 लाख मीट्रिक टन जीरा वर्ष 2023-24 में भारत ने निर्यात किया है। इसका 90 प्रतिशत राजस्थान से पहुंचा है और इसमें भी 70 प्रतिशत बाड़मेर का ही है। जीरे का बड़ा खरीदार अमरीका है। जीरे पर अब 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने से यह वहां महंगा हो जाएगा। ऐसे में जानकारों का कहना है कि अमरीका की पॉलिसी के अनुसार महंगा उत्पाद होने पर खुद जीरे के उत्पादन को बढ़ाएगा। इससे यहां से जाने वाले जीरे की मांग कम होने की संभावना है।

हैण्डीक्राफ्ट को लेकर दीपक शारदा बताते हैं कि अमरीका की ओर से 26 प्रतिशत कर लगता है तो इससे उत्पाद महंगा हो जाएगा। अभी यूरोप और अमरीका दो बड़े खरीदार है। हैण्डीक्राफ्ट में भी जो लकड़ी के उत्पाद है उनके कारखाने जोधपुर है। इसके लिए कारीगर और व्यापारी बाड़मेर से जुड़े हैं। हालांकि अमरीका से हैण्डीक्राफ्ट का आयात भारत नहीं कर रहा है। इसलिए अमरीका यदि पारस्परिक(रेसीप्रोकल) टैरिफ की शर्त वस्तु अनुसार तय करता है तो फिर हैण्डीक्राफ्ट को राहत मिलेगी, अन्यथा करोड़ों का यह व्यवसाय प्रभावित होगा।

जोधपुर-गुजरात और बाड़मेर के व्यापारी करेंगे मंथन

अचानक आए इस बदलाव ने व्यापार जगत में हलचल लाई है। उत्पादों को लेकर बाड़मेर में जोधपुर, गुजरात के व्यापारी सीधे जुड़े हैं। इसके अलावा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और अन्य राज्यों के व्यापारी भी अब इस मंथन में लग गए हैं, जो बाड़मेर से उत्पादों को खरीदते हैं।

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