8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सरकारी संरक्षण के अभाव में दम तोड़ रहा मटकी कारोबार, जानिए पूरी खबर

- कुंभकार परिवारों के पास नहीं जमीन, सरकार से कर चुके है मांग,कुंभकारों के सामने रोजगार का संकट
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

बाड़मेर

•

image

bhawani singh

•

Updated: 31 Mar 2021, 8:46 PM IST

Barmer news

Barmer news

बाड़मेर. सरकारी संरक्षण के अभाव में वर्षो से चल रहा मटकी उद्योग अब दम तोड़ रहा है। यहां कुंभकार इस मटकी को बनाने में गर्मी के मौसम में पसीने की बूंद बहाकर कड़ी मेहनत कर एक-एक मटकी बनाता है। लेकिन यह लोग जितनी मेहनत करते है, उनको उतना मुनाफा नहीं मिल रहा है। माटी आधारित कुंभकार उद्योग सालों नहीं सदियों पुराना है। आद्युनिक युग में इस उद्योग की महत्ता कम हुई है, लेकिन इसकी अहमियता आज भी कायम है। इस पर आज भी गर्मी की ऋतु में मटकियां खास से आम की पहली पसंद बनी हुई है।

बाड़मेर जिला मुख्यालय के बलदेव नगर सहित आस-पास इलाकों में करीब एक सौ परिवार मटकी बनाने में कार्य करते थे, लेकिन वर्तमान में सरंक्षण नहीं मिलने पर पचास फीसदी कमी आ गई है। मटकी उद्योग को जमीन आवंटन कर प्रोत्साहन देने की मांग को लेकर कुंभकार समाज के लोग कई बार सरकार के जनप्रतिनिधियों व जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत करवा चुके है। साथ ही शहर के बलदेव नगर में मटकी व्यवसाय का बड़ा कारोबार था, लेकिन वर्तमान में यहां कॉलोनियां बस गई है। अब मटकी पकाने के दौरान होने वाले दूषित प्रदूषण फैल रहा है।


संरक्षण का अभाव, दम तोड़ रहा उद्योग
माटी आधारित कुंभकार उद्योग को किसी भी प्रकार को कोई सरकारी संरक्षण नहीं है। कारीगर स्वयं के स्तर पर मंहगी माटी, बजरी व जलाऊ लकड़ी खरीद मटकियां बनाते हैं। मटकियों को स्टॉक में रखने के लिए कोई सुविधा नहीं होने पर कारीगरों को इन्हें कम लागत में व्यापारियों को बेचना पड़ता है। इस पर कड़ी मेहनत के बावजूद इन्हें कम पैसा मिलता है।
---
- सरकार दें संरक्षण
कुंभकारी उद्योग बहुत प्राचीन उद्योग है, लेकिन इसे किसी प्रकार का कोई सरकारी संरक्षण नहीं है। कम कमाई पर चाहकर भी चिमनी नहीं लगा सकते हैं। सरकार कुंभकारों को अनुदान आधार पर ऋण उपलब्ध करवाएं। - मुकनाराम प्रजापत
- मटकी उद्योग में मेहनत अधिक व मुनाफा कम है। सरकार सहयोग नहीं कर रही है। पीढिय़ों से हमारा परिवार मटिक पकाने का काम कर रहा है, लेकिन अब सरंक्षण के अभाव में यह काम बंद होने की कगार पर है। सरकार हमारी मदद करें, नहीं तो यह मटकी का कारोबार बंद हो जाएगा। - आईदानराम प्रजापत, व्यवसायी
---