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रिफाइनरी से नजदीक सबसे बड़ा अस्पताल, फिर भी सिर्फ एक चिकित्सक

पचपदरा. तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2004 में नगर में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) में क्रमोन्नत करने के बावजूद सेवाओं का विस्तार नहीं किया गया है।

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रिफाइनरी से नजदीक सबसे बड़ा अस्पताल, फिर भी सिर्फ एक चिकित्सक

रिफाइनरी से नजदीक सबसे बड़ा अस्पताल, फिर भी सिर्फ एक चिकित्सक

रिफाइनरी से नजदीक सबसे बड़ा अस्पताल, फिर भी सिर्फ एक चिकित्सक
अब तक पीएचसी भवन में संचालित सीएचसी
पचपदरा. तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2004 में नगर में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) में क्रमोन्नत करने के बावजूद सेवाओं का विस्तार नहीं किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि ि18 साल पहले हुई घोषणा के बाद तब आनन फानन में सीएचसी में डॉक्टर, एएनएम व जेएनएम स्टॉफ की नियुक्ति की थी, लेकिन भवन निर्माण नहीं किया। पहले गांव व इससे जुड़े क्षेत्र में 20 हजार के अनुमानित जनसंख्या थी जो अब रिफाइनरी आने के बाद मजदूरों के कारण लगभग 45 हजार तक पहुंच गई है। लगी है।

ढाई गुना बढ़ी ओपीडी

मौसमी बीमारियों के चलते अस्पताल के आउटडोर में रोज मरीजों की संख्या पहले से ढाई गुना बढ़ गई है। वायरल के साथ ही अब डेंगू जैसे लक्षण वाले मरीज भी मिलने लगे हैं। इसके चलते सुबह से ही अस्पताल में मरीजों की कतार लगी रहती है। अस्पताल में सिर्फ एक स्थायी व एक अस्थायी चिकित्सक कार्यरत हैं।

भवन न होने से नहीं बढ़ रहे बेड

पीएचसी को सीएचसी में क्रमोन्नत होने के 18 साल बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में केवल 10 बेड लगे हुए हैं । जबकि सीएचसी में 30 बेड होने चाहिए। भवन के अभाव में बेड नहीं बढ़ाए जा सके। आलम यह है कि ओपीडी में आने वाले मरीजों को ग्लूकोज लगाने के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।

स्त्री व शिशु रोग चिकित्सक की आवश्यकता

दर्जा प्राप्त सीएचसी में सुविधाओं के नाम पर केवल प्राथमिक उपचार ही है। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक नियुक्त न होने से क्षेत्र के लोगों को इलाज के लिए बालोतरा व जोधपुर के महंगे निजी अस्पताल जाना पड़ रहा है। वहीं अस्पताल में स्त्री व शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से मरीजों को बेजा परेशानी उठानी पड़ रही है।

अस्पताल में ओपीडी में मरीजो की संख्या पहले की संख्या पहले से ज्यादा होने लगी है, जिसका कारण वायरल बीमारी सहित नगर में बढ़ी जनसंख्या व रिफाइनरी के श्रमिकों का आना है। वहीं मरीजो को देखने के लिए एक स्थायी और एक अस्थायी सहित मात्र दो चिकित्सक लगे हैं। भवन की भी बड़ी समस्या है। - डॉ. खुशवंत खत्री, चिकित्साधिकारी, सीएचसी पचपदरा

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