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मालाणी कर रहे बंद, बसों की नहीं सुविधा, कैसे पहुंचेंगे बाड़मेर

- जिला मुख्यालय तक सीधा मार्ग ना बस सेवा-तीन बसें पकड़ कैसे पहुंचे जिला मुख्यालय, ग्रामीण चिंतित

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Malani express: No facility for buses, how to reach Barmer

Malani express: No facility for buses, how to reach Barmer

समदड़ी. जिला सीमा के गांवों से बाड़मेर की दूरी 175 किमी से अधिक है। मुख्यालय तक सीधा मार्ग व आवागमन को साधन नहीं होने पर तीन बस बदल कर वहां पहुंचना पड़ता है। गांव से यहां पहुंचने में एक तरफ का किराया 150 से 180 रुपए लगता है।

जबकि रेलगाड़ी से यहां पहुंचने में आधा समय व किराया का आधा पैसा लगता है। रेलवे के मालाणी एक्सप्रेस रेलगाड़ी के प्रस्तावित बंद करने के समाचार से सैकड़ों गांवों के ग्रामीणों की नींद उड़ गई है।

जिला मुख्यालय बाड़मेर की जिला सीमा की अंतिम ग्राम पंचायत ढीढस की दूरी करीब 175 किमी, ग्राम पंचायत रामपुरा की172 किमी है। चिरडिय़ा की दूरी 171, गोदों का बाड़ा की 169 किमी, महेश नगर की 167 किमी, खरंटिया की दूरी 165 किमी है।

शेष गांव समूजा, मजल, देवनगर, गिराद का ढाणा, खेजडिय़ाली, कोटड़ी, लाखेटा, कम्मों का बाड़ा, रातड़ी आदि दर्जनों गांवों की दूरी 172 से 168 किमी है। इन गांवों से जिला मुख्यालय तक सीधा मार्ग व आवागमन का साधन नहीं है।

तीन बसों का सफर, दो गुना किराया-

जिला सीमा के इन गांवों से बाड़मेर मुख्यालय तक सीधा मार्ग व आवागमन का सीधा साधन नहीं है। इस पर ग्रामीणों को पहले धुंधाड़ा, मजल, फिर समदड़ी, इसके बाद बालोतरा पहुंच बाड़मेर के लिए बस पकडऩी पड़ती है। इस पर एक तरफा किराया 150 से 180 रुपए लगता है।

सफर में पांच से छह घंटे लगते हैं। बाड़मेर पहुंचने तक दोपहर होती है। भोजना अवकाश को लेकर बंद कार्यालयों पर ग्रामीणों को अधिक इंतजार करना पड़ता है।

वापिस में गांव तक सीधी बस सेवा नहीं होने पर अधिक परेशानियां उठानी पड़ती है। रात आठ बजे बाद रेलवे स्टेशन बालोतरा, समदड़ी, धुंधाड़ा से गांवों के लिए कोई बस सुविधा नहीं होने पर इन्हें निजी स्तर पर किराए पर जीप, टैक्सी करके गांव तक पहुंचना पड़ता है। इनके महंगे किराए पर गरीब, मजूदरों व ग्रामीणों को अधिक परेशानियां उठानी पड़ती है।

रेलगाड़ी ही एकमात्र साधन, बंद होने के समाचार से परेशान-

कामकाज के लिए जिला मुख्यालय बाड़मेर पहुंचने व काम करवाकर वापिस घर लौटने के लिए एकमात्र मालाणी एक्सप्रेस रेलगाड़ी ही सबसे उपयुक्त है। यह प्रतिदिन सुबह 9.30 बजे बाड़मेर पहुंचते हैं। कामकाज कर वापिस में बाड़मेर से शाम 5.45 बजे रवाना होकर रात 8.30 बजे तक समदड़ी पहुंचती है।

कम समय व कम किराया लगने पर मालाणी एक्सप्रेस रेलगाड़ी दो दशक से अधिक समय से आवाजाही का प्रमुख साधान है। अब इसके बंद होने के समाचार से लोग चिंतित है।

सीधी बस सेवा नहीं, रेल भी हो रही बंद-

गांव से बाड़मेेर की दूरी 175 किमी से अधिक है। सीधी बस सेवा नहीं होने पर तीन साधन बदल कर यहां पहुंचना पड़ता है। एक तरफ के किराए में ही 175 से 180 रुपए खर्चहोते हैं। जबकि मालाणी एक्सप्रेस में इससे आधा किराया व आधा समय लगता है। इसके बंद होने को लेकर अधिक परेशान है।

- भूराराम सुथार, ढीढ़स

मालाणी एक्सप्रेस ही सबसे उपयुक्त, नहीं करें बंद- जिला कलक्टर, पुलिस अधीक्षक के पास समस्या समाधान, शिकायत निवारण व अन्य जिला स्तरीय कार्यालयों में कामकाज से हर दिन क्षेत्र भर से बड़ी संख्या में बाड़मेर लोग जाते हैं।

बाड़मेर पहुंचने व घर लौटने के लिए मालाणी एक्सप्रेस रेलगाड़ी ही सबसे उपयुक्त है। सीधी बस सेवा नहीं होने व इसके महंगे किराए से ग्रामीणों को अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। रेलवे एक्सप्रेस रेलगाड़ी को बंद नहीं करें।

- गोविंदसिंह चिरडिय़ा