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जेल में क्षमता से ज्यादा ठूंसे बंदी, सुरक्षा पर सवाल

- एक साल पहले दिवार तोड़ तीन बंदी निकल गए थे बाहर, बाड़मेर व बालोतरा की जेल में क्षमता से 88 अधिक बंदी
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barmer news

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बाड़मेर.
जिला कारागृह बाड़मेर व उप कारागृह बालोतरा में क्षमता से अधिक 88 बंदी ठूंस रखे हैं। ऐसे में जेल सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो जाते हैं। जितनी क्षमता है उससे अधिक बंदी भरे गए है। इसके चलते हर वक्त सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन को व्यवस्था संभालने में परेशानी हो रही है।


बाड़मेर व बालोतरा दोनों जेल में कुल 214 बंदियों को रखा जा सकता है। वर्तमान में दोनों स्थानों पर अभी 302 बंदियों को ठूंसा गया है। बंदियों की सुरक्षा के लिए नफरी की भी कमी है। बाड़मेर जिला करागृह में बंदियों की क्षमता 159 है। जबकि यहां अभी 212 बंदी रखे जा रहे हैं। इसी तरह बालोतरा कारागृह की क्षमता 59 की है, जबकि यहां 92 बंदी अभी है। हर दिन क्षमता से ज्यादा बंदी ठूंसे रहने से जेल प्रशासन के सामने व्यवस्था चलाने की परेशानी खड़ी हो रही है। क्षमता से दोगुने बंदी होने से जेल प्रशासन की परेशानी बढ़ गई है। साथ कोविड-19 तीसरी लहर की आंशका को देखते हुए भी जेल प्रशासन के सामने दो गज की दूरी का भी ख्याल नहीं रखा जा रहा है।


अंधिकाश हार्डकोर अपराधी
वर्तमान में जिला कारागृह में अंधिकाश हार्डकोर अपराधी है। यहां मादक पदार्थो की तस्करी के मामलों में लिप्त एनडीपीएस व चोरी के अंधिकाश बंदी है। वहीं सीमा पार से आए आरडीएक्स के एक दर्जन आरोपी भी शामिल है।


बढ़ रहा अपराध का ग्राफ
थार में तैल-गैस के बाद अपराध का ग्राफ धीरे-धीरे बढ़ रहा है। लेकिन जेल में व्यवस्थाओं को बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। दोनों जेलों में अंधिकाश हत्या, हत्या का प्रयास, पोक्सो व बलात्कार के आरोपी भी कम नहीं है।


दिवार तोड़ बाहर निकल गए थे तीन बंदी
यहां से मार्च 2020 में तीन बंदी शौचालय की दिवार तोड़कर बाहर निकल गए थे। हालांकि मुख्य गेट के पास दिवार तक पहुंचने पर सुरक्षा में तैनात प्रहरी ने देख लिया। उसके बाद जेल प्रशासन ने पीछा कर उन्हें दबोच लिया था। इससे बंदी फरार होने में नाकाम हो गए थे।
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बाड़मेर जेल में बंदी एक नजर
एनडीपीएस - 25
आरडीएक्स - 07
हत्या - 45
हत्या का प्रयास - 20
बलात्कार - 21
पोक्सो - 20
चोरी - 80
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- परेशानी तो रहती है
बाड़मेर जिला कारागृह में क्षमता से अधिक बंदी है। नए बैरक में ज्यादा बंदी रह सकते है। हालांकि आंकड़ों की तुलना में संसाधन व व्यवस्थाएं बहुत कम है। इसके बावजूद बंदियों पर पूरी निगरानी रखी जा रही है। - सुमेरसिंह, जेलर, जिला कारागृह, बाड़मेर
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