जीत का सम्मान ना मैडल पाने की खुशियां हुई नसीब

- कोरोना ने रोकी खेलों की उड़ान, मैडल मिले ना हौसला अफजाई

- स्कूली प्रतियोगिताओं पर रोक, खेल प्रतिभाओं को नहीं मिला प्रोत्साहन

By: Dilip dave

Published: 28 Oct 2020, 07:45 PM IST

दिलीप दवे

बाड़मेर. कोरोना का असर जिले की खेलप्रतिभाओं को भी सहना पड़ा है। पिछले साल से बेहतर प्रदर्शन की तैयारियों में लगे खिलाडि़यों को कोरोना के चलते ना तो जीत का सम्मान मिला और न ही मैडल पाने की खुशी नसीब हुई। जूडो में तो बाड़मेर का दबदबा राष्ट्रीय स्तर तक है जबकि एथलेटिक्स, खो-खो में भी जिला प्रदेश स्तर पर पहचान रखता है। बास्केटबॉल, कबड्डी, हॉकी सहित अन्य खेलों में भी खिलाडि़यों ने बाडमेर का नाम रोशन किया लेकिन इस बार कोरोना के चलते वे अपने प्रदर्शन को नहीं दिखा पाए।

कई प्रतिभाएं जो स्कू  ली स्तर पर आयुवर्ग के अनुसार इस बार भी भाग ले पाती, उनके लिए कोरोना किसी कहर से कम नहीं रहा, क्योंकि अब उन्हें आयुवर्ग व कक्षा के अनुसार नए वर्ग में भाग लेना होगा।

सीमावर्ती जिले सहित पूरे प्रदेश में खेलप्रतिभाओं के लिए कोरोना कहर बना। सत्र शुरू होते ही खेलकू  द प्रतियोगिता का आयोजन होता है। प्राथमिक शिक्षा में वृत्त, ब्लॉक, जिला, राज्य स्तर तक प्रतिभाओं को प्रतिभा निखाने का मौका मिलता है। कमोबेश यही स्थिति माध्यमिक स्तर की है जहां जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाएं चयनित होकर खेलकू  द में अपना व अपने जिले का नाम रोशन करती है।

एेसे में खेलकू  द में रुचि रखने वाले विद्यार्थी स्कू  ल स्तरीय प्रतियोगिता का इंतजार करते हैं। बड़े स्तर पर होते आयोजन- खेलों को लेकर विद्यार्थियों के साथ-साथ ग्रामीणों की भी रुचि रहती है। यहीं कारण है जनसहयोग से बड़े स्तर पर आयोजन होते हैं।

इस दौरान प्रतिभाओं को खेल में दमखम दिखाने न केवल अवसर मिलता है वरन नाम के साथ ईनाम और हौसला अफजाई भी मिलती है। एेसे में ग्रामीण खेल प्रतिभाएं खेलकू  द प्रतियोगिता का इंतजार करती है।

कई खेलों में बाड़मेर का दबदबा- जिले की खेलप्रतिभाओं की गांव व ढाणी से निकल कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। जूडो में तो बाड़मेर कई साल से राज्य स्तर पर अव्वल ही रहता रहा है। यहां की बालिकाओं ने जूडो में राज्य का प्रतिनिधित्व कर जिले का मान बढ़ाया है। हॉकी, बास्केटबॉल, एथलेटिक्स, खो-खो में भी बाड़मेर राज्य स्तर पर कई बार अपना डंका बजा चुका है।

प्राथमिक स्तर पर बीस, माध्यमिक स्तर पर तीस खेल- प्राथमिक स्तर पर छोटे-मोटे करीब बीस खेल आयोजित होते हैं जिसमें खो-खो, कबड्डी, एथलेटिक्स सहित विभिन्न दौड़ें होती है। प्राथमिक स्तर पर राज्य स्तर तक खिलाड़ी को प्रतिभा निखाने का मौका मिलता है। वहीं, उच्च प्राथमिक स्तर पर भी खेलने वाले खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक जाते हैं। माध्यमिक शिक्षा के तहत लगभग हर खेल की प्रतियोगिताएं होती हैं जिसमें खिलाड़ी राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर अपना हुनर दिखा जिले के नाम रोशन करते हैं।

प्रतिभाओं में छाई मायूसी- स्कू  ल स्तरीय खेलकू  द प्रतियोगिताएं ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढऩे का अवसर देती है। इसके कारण जिले की प्रतिभाओं ने राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जिले का नाम रोशन किया है। एेसे में इस सत्र में खेलकू  द प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं होने से खेल प्रतिभाओं में मायूसी छाई हुई है।- अनूपसिंह भाटी, बास्केबॉल खिलाड़ी

प्रतिभाओं को मिलता प्रोत्साहन- खेलों का शिक्षा के साथ बड़ा महत्व है। एेसे में प्राथमिक स्तर से ही खेलकू  द शुरू हो जाते हैं। इस बार प्रतियोगिता का आयोजन नहीं हुआ। खेलों में बाड़मेर की प्रतिभाओं ने राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है।- रतनपुरी गोस्वामी, शारीरिक शिक्षक राउमावि बीसू

जिले ने जीते कई मैडल- खेलकू  द में जिले की स्थिति बढि़या है। हमारे खिलाडि़यों का जूडो में एक तरह से एकाधिकार ही है। वहीं, कबड्डी, बास्केटबॉल, एथलेटिक्स, हॉकी में भी हमारा प्रदर्शन बेहतर रहा है। खेल प्रतिभाओं को खेलों के आयोजन पर फायदा तो मिलता है। उनकी पहचान होती है तो मैडल पर पूरा जिला नाज करता है। इस बार प्रतियोगिताएं नहीं होने से थोड़ी मायूसी है।- जेतमालसिंह राठौड़, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक शिक्षा बाड़मेर

Dilip dave Desk
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