
Advisor of Bullet Train Project
बाड़मेर. शहर का महावीर नगर इलाका। यहां विरेन्द्र सिन्हा के मकान के बारे में कम लोग ही जानते हैं। पड़ोसियों को जब पता पूछा तो उन्हांेने कहा सिन्हा यहीं रहते हैं। पड़ोस में यह पता नहीं है कि सामान्य से दिखने वाले इस घर के लाडले की असाधारण प्रतिभा पर जापान और भारत के प्रधानमंत्री ने भरोसा किया है।
देश की पहली बुलेट ट्रेन अहमदाबाद-
मुम्बई (98 हजार करोड़ ) के प्रोजेक्ट के एडवाइजर बाड़मेर के संजीव सिन्हा होंगे। जापान रेलवे ने सिन्हा को एडवाइजर की जिम्मेदारी सौंपी है।बाड़मेर में ग्रेफ में स्टोर कीपर रहे विरेन्द्र सिन्हा के बेटे संजीव बाड़मेर के पहले आईआईटीयन भी हैं। उनके पिता सेवानिवृत्ति के बाद बाड़मेर में ही रहते हैं।
अपना रास्ता खुद चुना
बेटे की उपलब्धि का पूछने पर पिता विरेंद्र की खुशी से आंखें नम हो जाती है फिर बताते हैं कि उसने बड़ी मेहनत की है। कड़े संघर्ष से आगे बढ़ा है। जिस जमाने में संजीव पढ़ रहा था, उस समय आईआईटी की समझ कम ही थी, लोग आईटीआई ही जानते थे। उसने मेहनत की और आगे बढ़ता गया।
उसने अपना रास्ता खुद चुना और जापान पहुंच गया। मेहनत और लगन के कारण ही आज इस मुकाम तक पहुंचा है। मैं पिछले दिनों जापान गया था। कल ही उसका मैसेज आया है। सरकारी स्कूल में पढ़कर आईआईटी करना और वो भी उस जमाने में जब कोई सोचता भी नहीं था यहां। मैं और वह दोनों यही कहते हंै कि हम बाड़मेर के है।
स्टेशन रोड स्कूल से की थी बारहवीं
संजीव के पिता 1973 में उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद से बाड़मेर आए थे, तब संजीव आठ माह के थे। यहां वे ग्रेफ में स्टोर कीपर रहे। उनकी मां ऊषा रानी महावीर नगर स्कूल में शिक्षिका थी।
संजीव ने यहां राजकीय हाई स्कूल स्टेशन रोड से बारहवीं की। इसमें बोर्ड में राज्य स्तर पर आठवीं वरीयता प्राप्त की।
इसके बाद आईआईटी कानपुर में चयन हो गया। आईआईटी पूर्ण होने पर मुम्बई में एक कंपनी में लगे और यहां से जापान चले गए।
जापान में उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स में बखूबी कार्य किया है। हाल ही में जापान रेलवे ने उन्हें एडवाइजर नियुक्त किया है। संजीव की शादी भी जापान में ही हुई है और उनके एक बच्ची है।
Published on:
12 Sept 2017 10:44 am
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