बाड़मेर. सीमावर्ती जिले बाड़मेर में शिक्षा की नींव ही कभी कमजोर थी,क्योंकि स्कू ल तो थे लेकिन अध्यापकों का टोटा था। स्थिति यह थी कि काफी स्कू ल एक शिक्षकों के भरोसे थे तो कई अध्यापकों की कमी के चलते ताले में कैद, लेकिन अब स्थिति सुधर रही है। पिछले करीब एक दशक से शिक्षकों की लगातार भर्ती के कारण अब एेसा विद्यालय कोई नहीं है जो अध्यापकों की कमी के चलते बंद है।