अब शिक्षा की नींव हो रही मजबूत, शिक्षक भर्ती के चलते घटी पदरिक्तता

- सरकारी विद्यालयों में अध्यापकों की पदरिक्तता में कमी से शिक्षा में सुधार

By: Dilip dave

Published: 24 Oct 2020, 08:20 PM IST

 बाड़मेर. सीमावर्ती जिले बाड़मेर में शिक्षा की नींव ही कभी कमजोर थी,क्योंकि स्कू  ल तो थे लेकिन अध्यापकों का टोटा था। स्थिति यह थी कि काफी स्कू  ल एक शिक्षकों के भरोसे थे तो कई अध्यापकों की कमी के चलते ताले में कैद, लेकिन अब स्थिति सुधर रही है। पिछले करीब एक दशक से शिक्षकों की लगातार भर्ती के कारण अब एेसा विद्यालय कोई नहीं है जो अध्यापकों की कमी के चलते बंद है।

एकल शिक्षकों के भरोसे चलने वाले विद्यालय भी काफी है जहां बीस से कम नामांकन है, उन्हीं स्कू  लों में यह स्थिति है। चार हजार प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में चौदह हजार शिक्षक लगे हुए हैं। एेसे में उम्मीद है कि अब बोर्डर पर भी शिक्षा की नींव मजबूर होगी। बाड़मेर जिले को शिक्षा की दृष्टि से कमजोर माना जाता रहा है। इसके पीछे कारण स्कू  लों में शिक्षकों की कमी के चलते पढ़ाई का नहीं होना रहा।

प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय जो शिक्षा की नींव माने जाते हैं, उनमें ही अध्यापकों का टोटा होने से थार के विद्यार्थी प्राथमिक स्तर पर ही आखर ज्ञान नहीं सीख पा रहे थे, लेकिन अब स्थिति में सुधार हुआ है। पिछले एक दशक में शिक्षकों की भर्ती होने का फायदा बाड़मेर को मिला और हजारों शिक्षक जिले में लगे। इसके चलते बॉर्डर के गांवों से लेकर शहरक्षेत्र के आसपास हर विद्यालय में शिक्षकों की कमी मिटी है।

इसका असर शिक्षण पर भी पड़ता नजर आ रहा है और बच्चों का सरकारी विद्यालयों में जुड़ाव बढ़ा है। गौरतलब है कि जिले के राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में २ लाख 6० हजार 601 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। एकल शिक्षकों की संख्या घटी- पूर्व में जिले में करीब पन्द्रह सौ से अधिक विद्यालय एकल शिक्षकों के भरोसे थे, लेकिन अब 817  स्कू  ल ही एकल शिक्षकों के भरोसे हैं, जिसमें से भी वे विद्यालय ज्यादा है जहां नामांकन कम होने से नियमानुसार एक शिक्षक ही लग सकता है। वहीं डेढ़ सौ से ज्यादा प्राथमिक विद्यालयों में तीन या इससे अधिक शिक्षक कार्यरत है।

आठवीं स्कूल में पन्द्रह शिक्षक- जिले में शिक्षकों के पद भरने के साथ बढ़ते नामांकन के चलते उच्च प्राथमिक विद्यालयों में दस से अधिक शिक्षक कार्यरत है। 81  उच्च प्राथमिक विद्यालय एेसे हैं जहां कार्यरत अध्यापकों की तादाद दस या उससे अधिक है।

शिक्षा में सुधार की उम्मीद- अध्यापकों के पद भरने से सीमावर्ती जिले में शिक्षण स्तर सुधरने की उम्मीद की जा रही है। इतना ही नहीं नई भर्ती में आए शिक्षक नवाचार करने में भी रुचि रख रहे हैं। एेसे में कई विद्यालय निजी विद्यालयों को भी टक्कर दे रहे हैं। शिक्षण स्तर में हो रहा सुधार- शिक्षकों की भर्ती होने से शिक्षण स्तर में सुधार हो रहा है। यह बॉर्डर के जिले की प्रतिभाओं के लिए अच्छा है, क्योंकि प्राथमिक स्तर पर ही बेहतर शिक्षा मिलेगी तभी आगे जाकर बच्चे अपनी प्रतिभा दिखा पाएंगे।- शेरसिंह भूरटिया, शिक्षक नेता

शिक्षक भर्ती से मिला फायदा- शिक्षकों की भर्ती होने का फायदा जिले को मिला है। काफी स्कू  लों में पदरिक्तता की स्थिति खत्म हो चुकी है। जहां एकल या दो शिक्षक है वहां नामांकन कम होने से यह स्थिति है। शिक्षक लगने से शिक्षा में सुधार हुआ है।- मूलाराम चौधरी, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक शिक्षा बाड़मेर 

Dilip dave Desk
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