भाजपा राज में पहली बार बनी पंचायत समिति में प्रधान कांग्रेस का चुना गया

अनुसूचित जाति रिजर्व सीट पर पहले प्रधान बने तेजाराम मेघवाल
इस बार ओबीसी आरक्षण सीट पर चुना जाएगा प्रधान
17 पं स सदस्य चुने जाएंगे, पहले ही चरण में

By: Ratan Singh Dave

Updated: 28 Oct 2020, 06:48 PM IST

गडरारोड़,
वर्ष 2015 में पहली बार बनी पंचायत समिति गडरारोड़ में अनुसूचित जाति से बाड़मेर जिला कलेक्टर कार्यालय में एएओ पद पर कार्यरत तेजाराम मेघवाल ने सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में भाग्य आजमाया।
तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार से नाराज चल रहे राजपूत और दाता फेक्टर के कारण भाजपा के 06 और कांग्रेस के 11 सदस्य जीतकर कांग्रेस बोर्ड बना और तेजाराम प्रधान चुने गए।
2018 विधानसभा चुनाव में तेजाराम ने चौहटन अनुसूचित जाति आरक्षित सीट से कांग्रेस से टिकट की दावेदारी पेश की लेकिन पार्टी ने पूर्व में चौहटन विधायक रहे पदमाराम को ही दुबारा टिकट दी।
इस बार गडरारोड़ प्रधान सीट पर ओबीसी प्रधान चुना जाएगा। दिसम्बर 19 में घोषणा के साथ ही कई नेताओं के प्रधान बनाने के कयास शुरू हो गए।
पूर्व में सरपंच पंच के चुनावों के साथ ही जिला परिषद,पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव होते थे इसलिए चुनावी माहौल कुछ अलग बनता था। पार्टियों को भी कम मशक्कत करनी पड़ती थी लेकिन इस बार गडरारोड़ में पंच,सरपंच के चुनाव जनवरी में ही संपन्न हो जाने से जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों को चुनने में पार्टियों को जातिगत समीकरण बैठाने में एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।
प्रधान हेतु सिंधी मुसलमान, रावणा राजपूत,सुथार, चारण समाज के नेता दावेदार हैं।
जहां कांग्रेस में विधायक अमीनखांन के पोते वही भाजपा में धनसिंह मौसेरी के नाम प्रधान उम्मीदवार की चर्चा में चल रहे है।इसके अलावा सुथार,चारण समाज से भी दावेदारी सामने आ रही हैं।
वही पहली बार आरएलपी के उम्मीदवार भी किस्मत आजमाने से दोनों दलों के लिए चिंताएं बढ़ा सकती हैं।
गडरारोड़ कस्बे की सीट ओबीसी महिला आ जाने से कस्बे के कई ओबीसी नेताओं के प्रधान बनने के सपने धूमिल हो गए।
जीत के लिए जरूरी:-
भाजपा:- राजपूतों को पुनःजोड़ना होगा।
अपने परम्परागत वोटर रहे राजपूतों की नाराजगी दूर कर फिर से जोड़ना होगा।
कांग्रेस:- एस.सी.,एस. टी. के नाराज वोटरों को जोड़ना होगा।

यह भी कयास लगाये जा रहे हैं:-
* विधानसभा चुनावों में राजपूतों ने कांग्रेस का साथ दिया लेकिन लोकसभा चुनाव में मानवेन्द्रसिंह जसोल को कांग्रेस से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से राजपूत भाजपा का दामन थाम सकते हैं।
* विधानसभा चुनाव में आरएलपी से ऊदाराम मेघवाल ने पचास हजार से अधिक वोट प्राप्त कर भाजपा की जीत रोकी। वहीं कांग्रेस से भी परम्परागत वोट बैंक छीना। यह फैक्टर इन चुनावों में भी दोनों दलों के लिए समस्या बन सकता हैं।

Ratan Singh Dave
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