
munabav railway station
बाड़मेर. पाकिस्तान की एक रेल पानी भी भारत में भरती है। पाकिस्तानी रेलवे स्टेशन पर इतना पानी ही नहीं है कि हर फेरे में रेल को उपलब्ध करवाए। भारत यह मदद 11 साल से कर रहा है। इस रेल से आने वाले यात्री भी भारत आकर सुकून पाते हैं। बात हो रही है भारत- पाक के बीच चलने वाली थार एक्सप्रेस की।
पाकिस्तान के कराची से चलकर यह रेल वहां के अंतिम रेलवे स्टेशन जीरो लाइन पहुंचती है। यहां पाकिस्तान की ओर से सुविधाओं के नाम पर एक लोहे की चद्दरों से बना रेलवे स्टेशन है और पीने के पानी का एक टैंकर आता है। इसके अलावा सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। इस रेल को लौटते समय जरूरत का पानी चाहिए। यह पानी भी भारत के आखिरी स्टेशन मुनाबाव से ले जाती है।
यात्री होते हैं परेशान
पाकिस्तान के लोहे की चद्दर वाले इस रेलवे स्टेशन पर चिकित्सा की कोई सुविधा नहीं है। किसी यात्री के बीमार होने, बीपी बढऩे या अन्य बीमारी पर पाकिस्तान में इमिग्रेशन और जांच के बाद मुनाबाव पहुंचने पर ही तत्काल उपचार मिलता है। यहां भारत ने चिकित्सा प्रबंध किए हैं।
मुनाबाव देखते ही मिलती है खुशी
पाकिस्तानी यात्री भी अपने मुल्क में लोहे की चद्दर के रेलवे स्टेशन को देखकर खिन्न होते हैं। भारत के मुनाबाव में एयरकूलिंग और चारों तरफ कांच के साथ आलीशान प्लेटफार्म व अन्य सुविधाएं उनको बरबस प्रशंसा को मजबूर करती हैं। बुजुर्ग और बच्चे यहां तीन- चार घंटे चलने वाली जांच के दौरान राहत महसूस करते हैं।
भारत का पूरा ध्यान
- 2006 में भारत ने यहां आलीशान अंतरराष्ट्रीय स्तर का रेलवे प्लेटफार्म बनाया।
-हर सप्ताह चिकित्सकों की पूरी टीम रहती है एक-एक यात्री की स्वास्थ्य जांच को।
- कैंटीन का संचालन किया जाता है हर फेरे के वक्त।
- पारदर्शी कांच का बना हुआ है मुनाबाव रेलवे स्टेशन।
- गर्मियों में यात्रियों की तबीयत बिगडऩे पर हाल ही में किया गया एयरकूल्ड।
- जोधपुर डीआरएम करते हैं हर चार माह में एक बार दौरा।
- रेलवे व सुरक्षा से जुडे़ उच्चाधिकारियों का साल में दो-तीन बार दौरा।
पाकिस्तान की बेफिक्री
- 2006 में अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़कर जीरो लाइन के पास बनाया प्लेटफार्म
- लोहे की चद्दरों के स्टेशन पर सुविधाआें का नितांत अभाव
- सुरक्षा को लेकर कोई प्रबंध नहीं, रेल संचालन के लिए आते हैं कुछ कार्मिक
- पानी के लिए भी कई बार तरस जाते हैं यात्री
- मरीजों को नहीं मिलता है रेलवे स्टेशन पर उपचार, भेज दिया जाता है भारत
- रेलवे व सुरक्षा से जुड़े अधिकारी नहीं दे रहे है रेलवे स्टेशन पर किसी तरह का ध्यान
फैक्ट फाइल
- 2006 में शुरू हुई दोनों देशों के बीच रेल
- 01 फेरा सप्ताह में हर शनिवार आती है रेल
- 350 से 500 यात्री आते हैं हर फेरे में दोनों देशों से
पाकिस्तान नहीं दे रहा ध्यान-
पाकिस्तान अपने रेलवे स्टेशन पर ध्यान ही नहीं दे रहा है। कराची से चलने के बाद सैकड़ों किलोमीटर का सफर करने वाले यात्री यहां पहुंचने तक थक जाते हैं। पाकिस्तान को यहां पर मूलभूत सुविधाएं व सुरक्षा प्रबंध करने चाहिएं लेकिन किए नहीं जा रहे हैं। यात्री वहां परेशान हो जाते हैं।- तेजदान चारण, पाक विस्थापित संघ
Published on:
03 Dec 2017 12:34 pm
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