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महिला शिक्षा के बढ़ते कदम, प्रदेश में उच्च शिक्षा में दबदबा कायम कर रही बेटियां

प्रदेश में प्रति 100 छात्रों के मुकाबले छात्राओं का नामांकन 105 से ज्यादा-पिछले पांच सालों में बदला उच्च शिक्षा का परिदृश्य-लिंगानुपात कम, फिर भी शिक्षा में आगे बढ़ रही बेटियां

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महिला शिक्षा के बढ़ते कदम, प्रदेश में उच्च शिक्षा में दबदबा कायम कर रही बेटियां

महिला शिक्षा के बढ़ते कदम, प्रदेश में उच्च शिक्षा में दबदबा कायम कर रही बेटियां

बाड़मेर. प्रदेश में बालक-बालिकाओं के लिंगानुपात में भले ही बराबरी नहीं हो, लेकिन उच्च शिक्षा में छात्राओं का दबादबा बढ़ रहा है। छात्रों से ज्यादा छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हुए आगे बढ़ रही है। प्रदेश में साल 2020-2021 में 100 छात्रों के मुकाबले 105 छात्राओं का नामांकन रहा है। यह स्थिति बताती है शिक्षा के क्षेत्र में अब महिलाएं किसी भी तरह से पीछे नहीं है।
अब शिक्षा को लेकर जागरूकता के साथ सुविधाएं भी बढ़ी है। इसलिए उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ती जा रही है। महिला कॉलेजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश में कुल 530 महिला कॉलेज है। इसके कारण भी शिक्षा को बढ़ावा मिला है। जानकार बताते हैं कि अब लोगों में सबसे बड़ा कारण जागरूकता है। अब बालिकाओं को अभिभावक भी पढऩे का अवसर दे रहे हैं। जिसकी बदौलत बालिकाएं शिक्षा में आगे बढ़ती नजर आ रही है।
साल 2006-07 में 100 छात्रों पर केवल 64 थी छात्राएं
ज्यादा पीछे जाने की जरूरत ही नहीं है। साल 2006-07 के सत्र में ही 100 छात्रों पर 64 छात्राएं ही उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही थी। ऐसा भी नहीं है कि इस दौरान कॉलेज कुछ कम थे। इस दौरान कुल 361 महिला महाविद्यालय थे। लेकिन जागरूकता की कमी थी, जो धीरे-धीरे बढ़ी और शिक्षा के महत्व के चलते छात्राएं अब आगे हैं।
साल 2016-17 में की बराबरी
कॉलेज शिक्षा में प्रति 100 छात्रों से बराबरी करते हुए साल 2016-17 में छात्राओं का का नामांकन बराबरी पर आया। जबकि इसके एक साल पहले सत्र तक यह संख्या 97 थी। लेकिन दूसरे साल बराबरी कर ली। इसके बाद तो यह संख्या यहां रूकी नहीं और लगातार बढ़ती गई। साल 2021 में 105 रही। वहीं इससे एक साल पीछे चले जाए तो यह संख्या 111 तक पहुंची थी।
लिंगानुपात में पीछे है, लेकिन शिक्षा में आगे
प्रदेश के बालक-बालिका लिंगानुपात में अभी बालिकाओं का लिंगानुपात 1000 बालकों के मुकाबले 948 है। लेकिन प्रदेश में बालिकाएं उच्च शिक्षा प्राप्त करने में छात्रों से आगे निकल चुकी है। 100 छात्रों पर 111 तक के आंकड़े को भी छू लिया था। साल 2020-21 में छात्राओं के नामांकन का आंकड़ा 105 पर रहा।
प्रति 100 छात्रों पर कैसे बढ़ी छात्राओं की संख्या
सत्र छात्राओं की संख्या
2006-07 .-64
2007-08 .-65
2008-09 .-71
2009-10 .-68
2010-11 .-74
2011-12 .-80
2012-13 .-82
2013-14 .-93
2014-15 .-94
2015-16 .-97
2016-17 .-100
2017-18 .-106
2018-19 .-108
2019-20 .-111
2020-21 .-105