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राजीव गांधी का बाराती..एशियाड की धुन..अलगोजे का जादूगर…और ये हाल…

Rajiv Gandhi's Baratati ..who is the magician of Algogi ... and this hall ...

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Rajiv Gandhi's Baratati..algoja magician ... and these hall ...

Rajiv Gandhi's Baratati..algoja magician ... and these hall ...

राजीव गांधी का बाराती..एशियाड की धुन..अलगोजे का जादूगर...और ये हाल...

- विश्व संगीत दिवस विशेष
ओम माली.

बाड़मेर पत्रिका.
करीब 90 साल की उम्र का ये शख्स जो अपने बिखरे हुए झोंपे के सामने बैठा दुआ कर रहा है कि दुबारा उसकी छत बन जाए और इसकी आवाज कोई नहीं सुन रहा आपको ताज्जुब होगा कि यह जब अपना वाद्ययंत्र अलगोजा बजाना शुरू करता है तो शर्तिया सुनने वाला एकदम भी नहीं खिसक सकता। अलगोजे के इस जादूगर का नाम है धोधेखां,अफसोस है कि संगीत के इस जादूगर जिसके अलगोजे की धुन पर एशियान 1982 के खेल शुरू हुए थे और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीवगांधी की शादी में बतौर बाराती शामिल कर अलगोजा बजवाया गया था आज इसकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। राजस्थान आकाशवणी में तो धोधेखां के अलगोजे के सुरों पर लोग कायल रहे है। भारत-पाकिस्तान दोनों मुल्कों में जिस धोधेखां के अलगोजे की दीवानगी है वो उम्र के इस पड़ाव में मुफलिसी में जी रहा है और शासन-प्रशासन की दर पर जाने के बावजूद उसकी मदद नहीं हो रही है। करीब एक महीना पहले आए तूफान में धोधेखां के घर की छत उड़ गई। वह इसके लिए दरख्वास्त कर चुका है लेकिन आज भी बूढ़ा धोधेखां बिना छत के है,वह कहता है जीते जी कोई करीब न आया ...मौत पर मालूम है मजमा लगेगा...।

बाड़मेर जिले के मांगता गांव का रहने वाला धोधेखां भारत के जाने-माने लोक कलाकारों में है। 70 साल से लगातार अलगोजे के धुन पर मोहित करने वाला धोधा बुढ़ापे में मामूली पेंशन के जरिए जीवन गुजार रहा है।
अल्लाह देगा, बंदों से क्या मांगना

धोधेखां कहता है कि बार-बार मांगना अच्छी बात नहीं। हालात सबको पता है। कद्र कहकर करवाने का क्या फायदा? एक महीने से छत उड़ी है,कभी कहते है पटवारी आएगा- कभी बोलते है ग्रामसेवक आएगा? मैं तो यह जानता हूं कि तूफान आया था छत ले गया...अब बारिश आ गई तो दीवारें भी ले जाएगी। 70 साल संगीत को दिए है। अलगोजा बजाने वाला एकमात्र हूं। जब भी कोई सुनता है तो इतनी दाद देता है और फिर मेरा ख्याल रखने की बातें होती है लेकिन बाद में कौन जिम्मेदारी लें। अब मैं भी सोचता हूं अल्लाह देगा, बंदों से क्या मांगना?
यह सफर यहीं न थम जाए

धोधेखां अलगोजे का विरला कलाकार है। उसके पास एक अलगोजा है जो पाकिस्तान से 70 साल पहले लाया था। अलगोजा मुंह में सांस फुलाकर इतनी मेहनत से बजाया जाता है कि फेफड़ों की ताकत लग जाती है। उम्र के इस पड़ाव पर भी धोधे यह कमाल करता है लेकिन आगे पीढ़ी में अलगोजे के कलाकार ढूंढने केा नहीं मिलेंगे।

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