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इस जिले के थाने में सड़ रहे आलू, बदबू झेलने के अलावा कुछ कर नहीं पा रही पुलिस

नौ दिन पहले बाड़मेर के सदर थाना पुलिस के हाथ आए आलू अब पुलिस के गले की फांस बन गए हैं। थाना भवन में खुले में पड़े आलू के कट्टों में सड़ांध पैदा हो गई है, लेकिन पुलिस सड़े हुए आलू की बदबू झेलने के अलावा कुछ कर नहीं पा रही है।

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नौ दिन पहले बाड़मेर के सदर थाना पुलिस के हाथ आए आलू अब पुलिस के गले की फांस बन गए हैं। थाना भवन में खुले में पड़े आलू के कट्टों में सड़ांध पैदा हो गई है, लेकिन पुलिस सड़े हुए आलू की बदबू झेलने के अलावा कुछ कर नहीं पा रही है। पुलिस ने मंडी के व्यापारियों को आलू बेचने का प्रयास भी किया, लेकिन व्यापारियों ने आलुओं का हाल देखकर लेने से इनकार कर दिया।

सदर थाना क्षेत्र के बलाऊ गांव के अली का तला की सरहद में 25 मई की रात पुलिस ने एक आयशर मिनी ट्रक में भरा में 22 क्विंटल 63 किलो अवैध डोडा पोस्त बरामद किया, जिसकी कीमत करीब करोड़ रुपए आंकी गई। यह डोडा पोस्त संभवत: झारखंड से तस्करी कर सांचौर के रास्ते बाड़मेर लाया गया। ट्रक में डोडा पोस्त को आलू की बोरियों के नीचे छिपाकर लाया गया। पुलिस ने अवैध डोडा पोस्त के साथ आलू भी जब्त कर लिए। आलू से भरे से 106 कट्टे सदर थाने के बरामदे में रख लिए गए और डोडा पोस्त मालखाने में डाल दिया गया।

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आलू के कट्टों के निस्तारण को लेकर पुलिस ने न्यायालय में अर्जी दाखिल की, जिस पर 31 मई को न्यायालय ने आदेश दिया कि निलामी प्रक्रिया के जरिए आलू का निस्तारण किया जाए। इस दौरान मुख्यमंत्री के बाड़मेर आगमन का कार्यक्रम तय हुआ। पुलिस मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में जुट गई। 2 जून को मुख्यमंत्री बाड़मेर आए, दिन में जनसभा हुई, रात्रि विश्राम भी बाड़मेर में हुआ। अगले दिन 3 जून को मुख्यमंत्री बाड़मेर से रवाना हुए। इस दौरान पुलिस दिन-रात ड्यूटी में व्यस्त रही और आलू नीलामी का इंतजार करते रह गए।

सड़े हुए लाल आलू
फुर्सत मिलते ही न्यायालय के आदेश की पालना में पुलिस ने आलू नीलाम करने का प्रयास किया। व्यापारियों ने थाने पहुंचकर आलू का हाल देखा तो छोटे-छोटे लाल आलू नजर आए। मौसम की मार के चलते नौ दिन से थाने के बरामदे में पड़े आलू सड़ भी गए, जिससे उनमें गंध भी पैदा हो गई। व्यापारियों ने आलू खरीदने से मना किया और साथ ही यह भी कह गए कि यह आलू खाने योग्य नहीं लग रहे हैं।

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अब यह विकल्प
मंडी के व्यापारियों के आलू लेने से इनकार के बाद पुलिस के सामने विकल्प यह है कि वह फिर से न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी और पूरी वस्तुस्थिति से न्यायालय को अवगत करवाएगी। फिर न्यायालय के आदेश के अनुसार आलू का निस्तारण होगा।

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