बुवाई ने पकड़ा जोर, अब तक पौने दो लाख हैक्टेयर में जुताई

- १४. ५४ लाख हैक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य
- मानसून सक्रिय होते ही बढ़ेगा ग्राफ

By: Dilip dave

Published: 26 Jun 2020, 08:35 AM IST



बाड़मेर. कोरोना संक्रमण व टिड्डी के हमले के बीच धरतीपुत्र मरुधरा को हरा-भरा करने में फिर से जुट गए हैं। खरीफ की बुवाई ने मानसून सक्रिय होने से पहले ही जोर पकड़ लिया है। जिले में प्री मानसून की बारिश में ही एक लाख अस्सी हजार हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। अभी मानसून सक्रिय होना है, एेसे में उम्मीद है कि जिले में तय लक्ष्य तक बुवाई हो जाएगी। गौरतलब है कि जिले में १४ लाख ५४ हैक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य दिया गया है।
सीमावर्ती जिला बाड़मेर खरीफ की बुवाई में प्रदेश के महत्वपूर्ण जिलों में स्थान रखता है। यहां सिंचित खेती कम होने से धरतीपुत्र भी मानसून के सक्रिय होने का पूरे साल इंतजार करते हैं। इस साल पहले कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए लॉकडाउन रहा तो फिर टिड्डियों ने हमला बोला, एेसे में रबी फसलों पर इसका असर रहा। इसी बीच प्री मानसून बारिश हुई तो किसानों ने खेतों की ओर रुख किया है। इसी के चलते पिछले कुछ दिनों में जिले में १ लाख ८० हजार हैक्टेयर में खरीफ की बुवाई हो चुकी है।
मानसून के बाद बढ़ेगा ग्राफ- मानसून एक दिन पहले ही प्रदेश में सक्रिय हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में बारिश होने के आसार है। एेसे में खरीफ की बुवाई का दौर शुरू होगा, जिससे उम्मीद है कि जिले में चौदह लाख से अधिक क्षेत्रफल में बुवाई होगी।
बाजरा भरपूर, मोठ-ग्वार की खूब- जिले में दिए लक्ष्य के अनुसार सबसे ज्यादा बुवाई बाजरे की होगी। बाजरे का लक्ष्य आठ लाख पैंतीस हजार हैक्टेयर है। इसके बाद ग्वार है जो करीब तीन लाख हैक्टेयर में बोया जाएगा। मोठ की बुवाई करीब दो लाख हैक्टेयर में होगी।
यह है लक्ष्य
फसल हैक्टेयर
बाजरा ८३५०००
ज्वार ७०००
मूंग ६००००
मोठ २३००००
ग्वार ३०००००
अरण्डी ३५००
तिल ७०००
मूंगफली ४०००
अन्य ८०००
कुल १४५४५००
खरीफ बुवाई अमूमन जून-जुलाई में ज्यादा- खरीफ की बुवाई अमूमन जून-जुलाई में ज्यादा होती है। मानसून की दस्तक भी इस दौरान ही होती है। एेसे में बुवाई अब जोर पकडेग़ी। जिले में लक्ष्य के करीब बुवाई हो जाएगी।- चेतनराम परिहार, सेवानिवृत्त कृषि पर्यवेक्षक।
अब बुवाई पकड़ेगी जोर- जिले में बुवाई अब जोर पकड़ेगी। मानसून सक्रिय होने के बाद ही किसान खेतों में जुताई करते हैं। एेसे में लक्ष्य के अनुरूप बुवाई हो जाएगी।- पाबूसिंह महेचा, कृषि अधिकारी, कृषि विभाग बाड़मेर

Dilip dave Desk
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