बाड़मेर. केवीके दांता की ओर से आयोजित लघु मुर्गीपालन प्रशिक्षण का मूल्यांकन करवा कर सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र व अंक तालिकाएं दी गई। इस अवसर पर केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. विनयकुमार ने कहा कि आज के जमाने में किसानों को ऐसी तकनिकी में काम करना जरुरी हो गया है जिससे उनकी आजीविका ही नहीं ु उनके परिवार की आमदनी को बरकरार रखा जा सके।

बाड़मेर जैसे जिले में मुर्गीपालन को लेकर कई सामजिक अडचने आती है लेकिन अब सोच बदल रही है। पशुपालन विशेषज्ञ बी.एल.डांगी ने कहा कि लघु मुर्गीपालन प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युवा अपना व्यवसाय प्रारम्भ कर सकते हैं और कहीं भी ऋण के लिए बैंक में आवेदन कर सकते हैं।

डांगी ने बताया कि जिले में कडक़नाथ, असील, मेवाड़ी, प्रतापधन, क्रोयलर, व्हाइट लेग हॉर्न एवं अन्य संकर नस्लों का पालन किया जा सकता है जिससे मुर्गीपालक अधिक से अधिक आमदनी प्राप्त कर सके। मुर्गीपालन के सफल व्यवसाय के लिए पांच मूलमंत्र मुर्गी की नस्ल, मुर्गी घर की सही बनावट, मुगियों के लिए दाने की व्यवस्था, प्रजनन व्यवस्था एवं बीमारियों से बचाव को ध्यान में रखना जरूरी है।

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