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आखिरी गांव रोहिड़ी का सरकार ने दर्द समझा

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The government of last village Rohida understood the pain

The government of last village Rohida understood the pain

राजधानी तक पहुंची रोहिड़ी की पीड़ा, 05 लाख तत्काल स्वीकृत

आखिरी गांव रोहिड़ी का सरकार ने दर्द समझा

बाड़मेर पत्रिका. सरहद के अंतिम गांव रोहिड़ी की पीड़ा प्रदेश की राजधानी जयपुर और राज्य सरकार तक पहुंची तो तत्काल इस पर कार्यवाही करते हुए 5 लाख रुपए के हैण्डपंप स्वीकृत किए है। साथ ही अधिकारियों से सरकार ने जानकारी मांगी है कि बॉर्डर के इस गांव सहित अन्य गांवों में पेयजल के हालात क्या है और उनसे निपटने के लिए क्या इंतजाम किए गए है। राजस्थान पत्रिका के 31 दिसंबर के अंक में मुख्य पृष्ठ पर प्रमुखता से प्रकाशित फोटो बॉर्डर का आखिरी गांव 3 डिग्री तापमान में दो घड़े पानी की मशक्कत शीर्षक से प्रकाशित हुआ। राजधानी जयपुर में प्रमुखता से प्रकाशित फोटो बाद राज्य सरकार ने तुरंत इस स्थिति की जानकारी चाही। अधिकारियों की रिपोर्ट बाद यहां पांच लाख रुपए के दो हैण्डपंप स्वीकृत किए गए है। इन हैण्डपंप को शीघ्र पूर्ण करने के कड़े निर्देश है। साथ ही अधिकारियों से बॉर्डर के गांवों की पेयजल की स्थिति की भी रिपोर्ट चाही है।

ग्रामीणों में खुशी व आभार जताया

आजादी के बाद से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। पत्रिका ने पीड़ा को उजागर किया जो हैडपंप की स्वीकृति मिली।

अभयसिंह
सराहनीय पहल

पत्रिका ने गांव की पीड़ा को उजागर किया तो हैडपंपों के लिए स्वीकृति मिली है। पत्रिका की सराहनीय पहल है।
गिरधरसिंह पूर्व सरपंच

कार्य शुरू होगा
गांव में दो स्थानों पर हैडपंप लगाने के लिए सरकार की ओर से स्वीकृति मिली है। इसके लिए 5 लाख रुपए स्वीकृत हुए है।

कौशल किशोर कनिष्ठ अभियंता जलदाय विभाग गडरारोड