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सात मंजिला इमारत में लगी आग से निकले सवाल न बुझे न बूझे, आखिर ऐसा क्यों? जानिए पूरी खबर

- आग के बाद भूल गए जिम्मेदार, हादसे के बाद बयान तक दर्ज नहीं किए - बड़ी आग के बाद भी नहीं लिया जा रहा है सबक

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 fire incident, questions arising

The questions arising from the fire in the seven-story building

बाड़मेर.शहर की सबसे बड़ी इमारत में तीन दिन पहले लगी आग ने सारे शहर को सहमा दिया था । सात मंजिला 65 आवासीय और 150 दुकानों की इस इमारत से उठते धुएं को देखकर लोगों का कलेजा दिल को आ गया था। गनीमत ही रही कि लपटें तेज न हुई नहीं तो कई जिंदगियां लपेट लेती। इस हादसे में भगवान का शुक्रिया करने वालों ने एक बार फिर बेफिक्री ओढ ली है और भगवान भरोसे इंतजाम हो गए है।

क्या है फायर फाइटिंग सिस्टम
पूरे भवन में बिल्डिंग में पाइप लाइन लगे होते है। इन पाइप का एक कनेक्शन पाइप से बाहर दिया होता है। जहां आकर दमकल का पाइप जोड़ दिया जाएगा। यहां से प्रेसर से पानी पहुंचेगा और जहां आग लगी है वहां पाइप जोड़कर आग बुझा सकते है। इसके लिए पानी का एक स्टोरेज भी भवन में देना होता है। बिल्डिंग प्लान में इसको इंगित कर नगरपरिषद को दिया जाता है ताकि वह कभी बड़ी घटना होने पर इस बिल्डिंग प्लान के साथ पहुंचे और तुरंत इस प्लान के अनुसार कार्य भी करें।

क्या स्थिति है जरा गौर करें
- शहर में गलियों और मौहल्लों में खड़ी है बड़ी इमारतें और मॉल

- शहर में बड़ी इमारतों ने नहीं लिए है फायर फाइटिंग सिस्टम
- स्टोरेज टैंक नहीं होने से पानी की भी नहीं पर्याप्त व्यवस्था

- भवनों अग्निशमन को लेकर भी नहीं पुख्ता प्रबंध
- बिल्डिंग प्लान में पार्किग और यहां बना दी है दुकानें

- नगरपरिषद नहीं करती है फायर फाइटिंग को लेकर मॉनीटरिंग
हाथ पांव फूल जाते है एेसे

- नगरपरिषद के पास है छह वाहन, दो कंडम, एक छोटा वाहन, तीन ही शुरू
- एक वाहन में ही रहता है हरवक्त पानी एेसे में आग लगते ही यह वाहन ही उपलब्ध

- शहर में ही अग्निशमन पहुंचने में लग जाता है आधे से एक घंटा
- 15 फायरमैन लगे हुए है, जो दो वाहनों के लिए ही पर्याप्त

बड़े हादसों ने शहर को हिलाया
- कृषि उपज मण्डी में चार दुकानों में दस करोड़ से ज्यादा का माल स्वाहा

- सिटी सेंटर मॉल में लगी आग और उड़ता रहा धुंआ
- कई साल पहले मुख्य बाजार में भी एक हुआ था हादसा

संकटमोचक बनती है कंपनियां
केयर्न एनर्जी के पास अपनी दमकल है और राजवेस्ट की भी। इनमें सबकुछ प्रशिक्षित व अत्याधुनिक संसाधन भी रहते है। आग के बड़े हादसों में यही वाहन पहुंचते है। इन वाहनों के लिए भी बड़ी दूरी मुश्किल रहती है। नगरपरिषद के पास अपना एेसा वाहन नहीं है। सालों पुराने सिस्टम से ही कार्य हो रहा है।

ये सवाल नहीं बुझे है
- सात मंजिला इमारत के रहवासी फ्लैट के लिए नियमानुसार चार लिफ्ट लगानी होती है, लेकिन यहां पर महज एक लिफ्ट लगी हुई थी।

- सात मंजिला व्यवसायिक व रहवासी मॉल में अगर आगजनी की घटना के बाद नियमानुसार सायरन बजना था, लेकिन ऐसा यहां पर कुछ नहीं हुआ।
- आग की घटना के बाद बिल्डिंग के लोगों से अभी प्रशासन व पुलिस की ओर से पूछा भी नहीं गया है कि उनकी शिकायतें क्या है

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