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यातायात पुलिस ने नहीं लगाई लगाम, ट्रैक्टर ने छीन ली मासूम की जान

-यातायात पुलिस ने सख्ती से नहीं निभाई अपनी जिम्मेदारी-पूरे दिन शहर की मुख्य सड़कों पर दौड़ते हैं ट्रैक्टर -पत्थर-बजरी से भरी ट्रॉलियां और पानी के टैंकर चलते हैं बेखौफ -सुबह 8 से शाम 8 बजे तक है शहर में भारी वाहनों पर रोक...

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Traffic police did not put a rein, tractor snatched innocent life

Traffic police did not put a rein, tractor snatched innocent life

बाड़मेर. शहर की मुख्य सड़कों सहित गलियों में पूरे दिन सामान से भरी ट्रॉलियों के साथ दौड़ते टै्रक्टर जानलेवा साबित हो रहे हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण बुधवार शाम को ट्रैक्टर की चपेट में आने से मासूम की जान चली गई। हादसा जिला चिकित्सालय के सामने हुआ। हादसे के बावजूद गुरुवार को भी ट्रैक्टर चालक मनमर्जी से चलते रहे। शहर की मुख्य सड़कों पर दौड़ते ट्रैक्टरों को किसी ने रोकने की जरूरत भी नहीं समझी।

यातायात पुलिस ने दो साल पहले सुबह 8 से रात 8 बजे तक शहर में भारी वाहनों के साथ ट्रैक्टरों के आवागमन पर रोक लगाई थी। लेकिन इसे सख्ती से लागू करने में कार्मिक नाकाम साबित हुए। जिसका नतीजा यह हुआ कि हादसा हो गया। छोटी-मोटी दुर्घटनाएं तो ट्रैक्टरों के कारण रोज ही होती हैं और जिम्मेदार उनकी अनदेखी कर कत्र्तव्य की इतिश्री कर रहे हैं। पत्रिका टीम ने गुरुवार को शहर के विभिन्न इलाकों को स्कैन किया तो हर तरफ टैंकरों और ट्रालियों के साथ बेलगाम टै्रक्टर दौड़ते नजर आए।

इन मार्गों पर अधिक समस्या

शहर के राय कॉलोनी रोड, गेंहू रोड, स्टेशन रोड, सुभाष चौक, रैन बसेरा, ढाणी बाजार, जवाहर चौक, पुरानी सब्जी मंडी, हाई स्कूल रोड, हमीरपुरा, प्रतापजी की प्रोल सहित कई क्षेत्रों में सुबह से शाम तक दर्जनों ट्रैक्टर दौड़ते हैं। इनमें पत्थर और बजरी के साथ पानी के टैंकर रहते हैं। लेकिन कोई इनको रोकना तो दूर, टोकता तक नहीं हैं।

छूट मिली कुछ को, फायदा सभी ने उठाया

निर्धारित समय के दौरान ट्रैक्टरों की शहर में आवाजाही पर रोक लगने पर सरकारी काम में लगे कुछ टै्रक्टरों को छूट दी गई थी। नगर परिषद व यातायात पुलिस की एनओसी के बाद कुछ ट्रैक्टरों को आने-जाने दिया जा रहा था। उनके पास बकायदा इसके कागजात होते थे। सरकारी की आड़ लेते हुए धीरे-धीरे अन्य ट्रैक्टर चालक भी शहर के भीतर तक पहुंचने लगे। क्योंकि जिम्मेदार भी उनको रोकते नहीं थे। इसलिए हौसले बढ़ते गए। अब तो किसी भी गली या मोहल्ले में धड़ल्ले से ट्रैक्टर कभी भी पहुंच जाते हैं। नियमों की पालना करवाने वाले की ओर से अनदेखी के कारण ऐसा हो रहा है।

बाजार और गलियों में बनते हैं जाम का कारण

मुख्य बाजार और गलियों में ट्रैक्टरों की आवाजाही से यातायात बाधित और जाम होता है। इसके साथ तेज गति से ट्रैक्टर दौडऩे पर हरदम हादसे की आशंका लगी रहती है। ट्रैक्टर व ट्रॉली पर रिफ्लेक्टर आदि नहीं होने से भी रात के समय हादसे का अंदेशा रहता है। यातायात पुलिस थाने और चौकी के सामने से दौड़ते टै्रक्टरों पर पुलिस की लगाम नजर नहीं आती है।