भारत-पाकिस्तान के दो युवकों को रिहाई का इंतजार


तुम बड़ा दिल करो, हम हृदय विशाल
- पाकिस्तान में गेमराराम, भारत में भागचंद
- दोनों की वतन वापसी हों जब चाहे दोनों देश

By: Ratan Singh Dave

Published: 27 Feb 2021, 11:57 AM IST

बाड़मेर पत्रिका.
भारत-पाक दोनों के लिए एक मौका है जब वे बड़ा दिल करके दो गरीब बेटों को उनकी वतन वापसी का मार्ग प्रशस्त कर सकते है। एक बदहवासी में करीब तीन माह पूर्व भारत से पाकिस्तान चला गया है तो दूसरा बाड़मेर(भारत) में रिहाई के आदेश बावजूद संप्रेषण गृह में है। भारत-पाकिस्तान रेशमा के शव को भारत लाने जैसी ही नजीर पेश करें तो यह संभव है।
गेमराराम(पाक की जेल में )
सीमावर्ती कुम्हारों का टिब्बा(सज्जन का पार) निवासी गेमराराम बदहवासी में सीमा लांघ पाकिस्तान चला गया है। मां-बाप इसका इंतजार कर रहे है। गेमराराम की वतन वापसी को लेकर परिजनों व विभिन्न संगठनों ने राज्य व केन्द्र सरकार तक ज्ञापन दिए है। पथराई आंखों से परिजन इसका इंतजार कर रहे है।
5 नवंबर 2020 को तारबंदी पार कर पाक गया
5 जनवरी को पाकिस्तान ने दी भारत को जानकारी
20 जनवरी को पत्रिका ने किया खुलासा
21 जनवरी से शुरू हुए गेमराराम की घर वापसी के प्रयास
24 जनवरी को जानकारी आई हैदराबाद जेल में है गेमराराम
भागचंद कोळी (भारत के सुधारगृह मेे )
पाकिस्तान का भागचंद पुत्र लक्ष्मण कोळी निवासी गुलामनवी खिपरो सांगड़ पाकिस्तान का है और तारबंदी लांघकर आया। इससे संयुक्त पूछताछ हुई और सामने आया कि यह भी बदहवासी में ही भारत आ गया। अवैध भारत आने और तारबंदी लांघने के कारण इसको किशोर सुधारगृह भेजा गया। भागचंद के जुलाई में हुए आदेश बाद भारत के गृहमंत्रालय को दस्तावेज भेज दिए गए है। उच्च स्तर से ही इसकी वतन वापसी संभव है।
9 सितंबर 2019 को भागचंद तारबंदी लांघ भारत आया
10 सितंबर 2019 को बीएसएफ ने पुलिस थाना में रिपोर्ट की
27 सितंबर 2019 को भागचंद को न्यायालय ने किशोर संप्रेषण गृह में भेजा
28 सितंबर 2019 से संप्रेषण गृह मेे
2 जुलाई 2020 को किशोर न्यायालय ने रिहा करने के आदेश किए
नजीर बना था रेशमा का मामला
सीमावर्ती अगासड़ी गांव की महिला रेशमा का इंतकाल 25 जुलाई 2018 को पाकिस्तान में हो गया था और उसकी आखिरी इच्छा वतन की माटी नसीब होने की थी। पत्रिका ने रेशमा की मिट्टी को मिले माटी अभियान चलाया तो 31 अगस्त को भारत-पाक ने मुनाबाव के गेट खोलकर रेशमा के शव को पाकिस्तान लाने की अनुमति दी। दोनों देशों में तनाव के दिनों में हुआ यह ऐतिहासिक निर्णय दोनों देशों की मानवीय संवेदना के लिए निर्णय के रूप में नजीर बन गया है। इन दोनों बेटों के मामले में भी ऐसी नजीर की दरकार है।
25 जुलाई2018 रेशमा का पाकिस्तान मथुनचानिया में इंतकाल
27 जुलाई 2018 पत्रिका का समाचर बाड़मेर की महिला का पाकिस्तान में इंतकाल, परिजन परेशान कब आएगा शव
27 जुलाई 2018 विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने किया पाक दूतावास को ट्वीट
28 जुलाई 2018 शव के लिए रोकी थार एक्सप्रेस देरी की वजह से नहीं आ सका शव
30 जुलाई 2018 भारत-पाक ने लिया ऐतिहासि निर्णय शव के लिए खोले जाएंगे मुनाबाव के गेट
31 जुलाई 2018 भारत-पाक ने खोले मुनाबाव के गेट शव पहुंचा बाड़मेर

Ratan Singh Dave
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