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केन्द्रीय मंत्री बोले :01सरकार बदलेगी तब, 02 जमीन नहीं दी, 03 अभी मंत्री से मिलूंगा

दुबई बनने का सपना: 03 बड़े काम अटके केन्द्र में मंत्री और जिले के सांसद कैलाश चौधरी का मानना है कि रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल हब बनने के बाद बाड़मेर में विकास नजर आएगा। वे कहते है कि बाड़मेर को रॉयल्टी में हिस्से के लिए पत्र लिखेंगे। अभी तक के बाड़मेर के विकास से संतुष्ट है। बाड़मेर के दुबई बनने के सपने में तीन बड़े काम जो उनके कार्यकाल में अधरझूल में है,उनको लेकर भी उन्होंने पैरवी करने या फिर अगली बार प्रदेश में भाजपा सरकार आने पर काम करवाने का कहा है।

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केन्द्रीय मंत्री बोले :01सरकार बदलेगी तब, 02 जमीन नहीं दी, 03 अभी मंत्री से मिलूंगा

केन्द्रीय मंत्री बोले :01सरकार बदलेगी तब, 02 जमीन नहीं दी, 03 अभी मंत्री से मिलूंगा

बाड़मेर. बाड़मेर के दुुबई बनने का सपना साकार नहीं हुआ है। इसको लेकर जनप्रतिनिधि खुुलकर पैरवी नहीं कर पाए है और अभी भी उनकी राय गुगली हो रही है। 2009 से अब तक 15 खरब की रॉयल्टी दे चुके बाड़मेर के हिस्से में खास कुछ नजर नहीं आ रहा है। इक्कीसवीं सदी में मॉल- सड़कें- हाईवे और पुल सभी जिलों में बने है। मेडिकल कॉलेज, अस्पताल की सुविधाएं भी अन्यत्र जैसी ही है, दुबई वाला लुक तो अलग ही है। खैर, दुुबई नहीं बनने की बात पर क्याा बोले केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री एवं सांसद, पत्रिका के सवाल-जवाब-
पत्रिका. बाड़मेर में दुबई बनने का सपना साकार हुुआ है।
कैलाश- गैस, तेल, रिफाइनरी का कार्य हो रहा है। एक लाख करोड़ खर्च कर बन रही रिफाइनरी के बाद बॉयो प्रोडक्ट्स के 130 कारखने लगेंगे। इस इंडस्ट्री के बाद में यहां विकास नजर आएगा। अभी रिफाइनरी का कार्य प्रगति पर है। यह दुबई से भी आगे जाएगा।
पत्रिका. 15 खरब रुपए अब तक केन्द्र व राज्य को रॉयल्टी मिली, बाड़मेर को हिस्सा कितना मिला?
कैलाश- रॉयल्टी मिली है इसमें कोई दोराय नहीं है। भारतमाला के तहत सड़कों का निर्माण, रेलवे के काम, मेडिकल कॉलेज व अन्य सुविधाएं जो भी मिल रही है,वह विकास है। मैं पैरवी करूंगा कि बाड़मेर को ज्यादा सुविधा दी जाए क्योंकि बाड़मेर में तेल-गैस का खजाना है। यहां से राजस्व मिल रहा है तो वरीयता दी जाए।
पत्रिका- चार गांव जहां तेल-गैस-रिफाइनरी-कोयला है,उनको एशिया के समृद्ध गांव बनाने का रोडमैप है?
कैलाश- मंै चार गांव नहीं पूरे जिले की ही पैरवी करूंगा। संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए पत्र लिखूंगा।
पत्रिका. सूखा बंदरगाह का क्या हुआ, दुुबई बनने का बड़ा आधार था?
कैलाश- पूर्व में मुख्यमंत्री वसुंधराराजे रही तो सूखा बंदरगाह को लेकर बात काफी आगे बढ़ी थी,लेकिन राज्य सरकार बदलते ही यह मामला खटाई में पड़ गया। अब भाजपा सरकार वापिस आएगी तो इसको प्राथमिकता से करवाएंगे ।
पत्रिका- जैसलमेर-बाड़मेर-भाभर रेलवे लाइन अटक गई,ऐसा क्यों?
कैलाश- मैं आज ही रेलमंत्री अश्वनीकुमार से मिल रहा हूं। उन्हें पत्र लिखकर मांग कर रहा हूं। भाभर के आगे एक स्टेशन को जोडऩे को लेकर बात अटकी है,उसके लिए बात करेंगे। इसके लिए नक्शा बना दिया गया हैै। यह कार्य करवाया जाएगा।
पत्रिका-एयरपोर्ट का क्या हुआ, यह मामलाा कहां रह गया?
कैलाश- भारत सरकार की तरफ से कोई मामला अटका नहीं है। राज्य सरकार ने जमीन ऐसी आवंटित की है जो उपयुक्त नहीं हैै। रेलवे पटरी और एयरफोर्स स्टेशन के बीच में एक लंबी पट्टी दे दी है। यहां एक हवाईजहाज खड़ा नहीं रह सकता। राज्य सरकार जमीन पर्याप्त देती तो काम हो जाता। राज्य सरकार को दुबारा पत्र लिखा है। जमीन देत है तो काम हो जाएगा।
पत्रिका- तीन बड़े काम आपके कार्यकाल में क्या हुए, जिससे दुबई जैसा लुक आ रहा हों?
कैलाश- रिफाइनरी के कार्य का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। इसके बाद ही काम हुआ है। अब वे ही इसका शुभारंभ करेंगे। बाजरा अनुसंधान केन्द्र की स्वीकृति गुड़ामालानी में करवाई गई है। बाड़मेर-बालोतरा- जैसलमेर तीनों रेलवे स्टेशन को अमृत योजना में लियाा है और पूूरी रेलवे लाइन बॉर्डर तक इलेक्ट्रीक हो रही है।
पत्रिका- कंपनियों में स्थानीय को रोजगार और अन्य कार्य हुए है?
कैलाश- अभी 70 प्रतिशत स्थानीय लोग काम कर रहे है। सीएसआर से काम हुए है, जहां नहीं हुए हैै वहां निर्देश देकर करवाए जाएंगे। विकास के कार्य में समझौता नहीं होगा।

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