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इंतजार…एक वर्ष बीतने के बाद भी किसानों को नहीं मिली बीमा क्लेम राशि

शिव. विक्रम संवत 2078 के अकाल के बाद गिरदावरी रिपोर्ट व फसल क्रॉप कटिंग के बाद भी हजारों किसानों को फसल बीमा के तहत के लिए क्लेम राशि का इंतजार है। गत वर्ष क्षेत्र के समस्त 179 राजस्व गांवों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से गिरदावरी रिपोर्ट के बाद अभावग्रस्त घोषित किया गया था।

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शिव.क्षेत्र के एक खेत में प्रभावित फसल (फाइल फोटो)

शिव.क्षेत्र के एक खेत में प्रभावित फसल (फाइल फोटो)

शिव.क्षेत्र के एक खेत में प्रभावित फसल (फाइल फोटो)


शिव. विक्रम संवत 2078 के अकाल के बाद गिरदावरी रिपोर्ट व फसल क्रॉप कटिंग के बाद भी हजारों किसानों को फसल बीमा के तहत के लिए क्लेम राशि का इंतजार है। गत वर्ष क्षेत्र के समस्त 179 राजस्व गांवों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से गिरदावरी रिपोर्ट के बाद अभावग्रस्त घोषित किया गया था।

किसानों ने विभिन्न बैंकों के साथ सहकारी समितियों से लिए ऋण से खेती की थी ।परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने से खेतों में धान की उपज नहीं हुई। जिससे किसानों के सामने ऋण राशि चुकाने की समस्या आ गई थी। किसानों ने सेठ साहूकारों से राशि लेकर ऋण राशि ब्याज व फसल बीमा प्रीमियम के साथ अदा की।

पूरा नहीं हुआ योजना का उदेश्य

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के फायदे के लिए थी। इसमें बीमा कंपनियों को किसानों से न्यूनतम प्रीमियम वसूलकर उनकी फसल का बीमा करना किया जाता है, ताकि प्राकृतिक आपदा में फसल नष्ट होने पर किसानों को उसकी क्षतिपूर्ति मिल सके। फसल बीमा करने में कंपनियां तो मालामाल हो गईं। लेकिन किसानों को उसका खास फायदा नहीं मिल रहा है। बीमा कंपनियों ने चार गुना प्रीमियम 1 करोड़ 64 लाख की राशि वसूलने के बाद भी किसानों को प्राकृतिक आपदा में फसल नष्ट होने पर किसानों को क्लेम राशि नहीं मिली है।

फैक्ट फाइल

तहसील क्षेत्र- शिव

अकाल प्रभावित राजस्व गांव- 179

अकाल वर्ष-विक्रम संवत 2078

फसल- खरीफ

बीमित फसलें-बाजरा,ग्वार, मूंग, मोठ,तील,अरंडी

जारी बीमा पॉलिसी- 81140

बीमित भूमि( हैक्टेयर)- 95153

किसानों से वसूला प्रीमियम-16375434 रुपए

केसीसी में स्वयं हो जाता था फसल बीमा

बैंक से क्रेडिट कार्ड बनवाकर सीजनल ऋण लेने वाले किसानों की फसलों का बीमा अब तक स्वत: ही हो किया जा रहा है। किसान बैंक से जितना लोन लेते हैं, उसी के आधार पर इंश्योरेंस कंपनी उनकी फसल का बीमा करती है। सरकार की इस योजना के पीछे उद्देश्य है कि दैवीय आपदा (जैसे- तेज बारिश, बाढ़, ओलावृष्टि, सूखा आदि) से अगर उनकी फसल को नुकसान होता है, तो बीमा कंपनी उस पर नुकसान के आधार पर क्लेम देगी।

वर्ष 2021 में तहसील क्षेत्र के सभी गांवों में अकाल की स्थिति थी। खेतों में बोई फसलें बारिश के अभाव में सूख गई थी। किसानों ने सेठ साहूकारों से उधार राशि लेकर बैंकों का ऋण अदा किया।ज्ज्

गेमरसिह सोढ़ा, किसान करनीनगर

किसानों को एक वर्ष बाद भी फसल बीमा के तहत क्लेम नहीं मिलने से अब उनकी हालात नाजुक होती जा रही है। अब सेठ- साहूकारों से लिया हुआ ऋण अदायगी में समस्या आ रही है। बीमा करवाने का मतलब भी यही है कि जरूरत पर लाभ मिले। ज्ज्

ईश्वरसिंह राठौड़, पंचायत समिति सदस्य

खरीफ 2021 फसल बीमा के तहत प्रभावित क्षेत्रों की गिरदावरी रिपोर्ट व क्रॉप कटिंग के आधार पर क्लेम जारी करने का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, जल्द ही राशि रिलीज हो जाएगी।ज्ज्

राधेश्याम विश्नोई, एआईसी बाड़मेर

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