
barmer oil field बाड़मेर के क्रूड ऑयल खजाने से कम क्यों पड़ रहा तेल?
बाड़मेर .
बाड़मेर के तेल का खेल अब समझ से बाहर जाने लगा है। जहां एक ओर प्रदेश के mega project refinery के लिए 5.50 लाख बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है और अब तक उत्पादन 3.50 लाख बैरल प्रतिदिन हो जाना चाहिए था उल्टा स्थिति यह हो गई है कि 1.13 लाख बैरल प्रतिदिन पर आ गया है जो वर्ष 2013 के उत्पादन के मुकाबले आधा हो गया है, 2013 में 2.25 लाख बैरल प्रतिदिन को छू गया था। मुश्किल यह है कि तेल का उत्पादन यों दिनों-दिन घटता गया तो पचपदरा रिफाइनरी के लिए प्रतिदिन 5.50 लाख बैरल तेल की आपूर्ति कहां से होगी? आत्मनिर्भरत रिफाइनरी का सपना इस परिस्थिति में टूटता नजर आएगा।
यों घट रहा है तेल (प्रतिदिन)
2012-13-2.25 लाख बैरल
2013-14-2.25 लाख बैरल
2016-17-2.00 लाख बैरल
2017-18- 1.75 लाख बरैल
2018-19-1.65 लाख बैरल
2019-20-1.50 लाख बैरल
2020-21-1.40 लाख बैरल
2021-22-1.13 लाख बैरल
refinery की पूर्ति कैस होगी
बाड़मेर में बन रही रिफाइनरी 9 मिलियन टन वार्षिक क्षमता की है। अरब आयातित तेल के अलावा बाड़मेर से 5.50 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आपूर्ति चाहिएगी। बाड़मेर के तेल अभी केवल 1.13 लाख बैरल प्रतिदिन ही है। हालांकि देश में कहीं पर भी रिफाइनरी एक बेसिन आधारित नहीं होती है लेकिन बाड़मेर से मिलने वाला क्रूड कम होने की फिक्र है।
2018 के लक्ष्य के विपरीत
16 जनवरी 2018 को बाड़मेर में रिफाइनरी का कार्य शुभारंभ हुआ तब केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने दावा किया था कि बाड़मेर में मौजूदा समय में 1.75 लाख बैरल तेल निकल रहा है जिसको इसी साल 2.50 लाख बैरल पहुंचाया जाएगा और 2021 में 3 लाख व 2022 में 3.50 लाख बैरल पहुंच जाएगा और रिफाइनरी शुरू होगी तब तक यह 5.50 लाख बैरल पहुंचेगा,लेकिन स्थितियां ठीक विपरीत हो गई है।
क्यों आया यह अंतर
प्राकृतिक रूप से कम
पहला कारण इसको प्राकृतिक रूप से कम होना माना जा रहा है, किसी भी बेसिन की आयु के अनुसार उसका उत्पादन रहता है,लेकिन बाड़मेर को तो अब देश का सबसे युवा ऑयल फील्ड माना जा रहा है।
कंपनी-सरकार आमने-सामने
तेल कंपनी और सरकार आमने-सामने है। उत्पादन साझा अनुबंध को कंपनी 2030 तक के लिए मांग रही है लेकिन सरकार इसको छोटी-छोटी मियाद में बढ़ा रही है। इसको लेकर न्यायालय तक मामला पहुंचा। केन्द्र सरकार 10 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी और मांग रही है, कंपनी अब तक दी जा रही 60 प्रतिशत हिस्सेदारी को भी ज्यादा बता रही है। अन्य कई मामलों में भी आपस में टसल है।
आयु रूप से अंतर आया
यह अंतर बेसिन की आयु पर निर्भर है। इस बेसिन में तेल कम होना प्राकृतिक कारण है। नई खोज की जा रही है, उनका परिणाम सकारात्मक आते तेल बढ़ भी जाएगा।- अयोध्याप्रसाद गौड़, महाप्रबंधक केयर्न
Published on:
11 Apr 2022 05:59 pm
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