
word of self esteem is not mine, it belongs to people of Barmer-Jaisalmer
रतन दवे
बाड़मेर. भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए शिव विधायक एवं पूर्व वित्तमंत्री जसवंतसिंह के पुत्र मानवेन्द्र का कहना है कि उनके पिता को उनके निर्णय की जानकारी है लेकिन उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। बीमार होने की वजह से उन्होंने संकेत जरूर दिया। बात जसवंतङ्क्षसह के सभी पुराने मित्रों से की थी और किसी ने मुझे नहीं रोका, सभी ने आशीष दी है। यहां तक की अटलबिहारी वाजपेयी के परिवार से भी मैने आशीर्वाद लिया।
पत्रिका-क्या आप या आपके परिवार के किसी सदस्य की विधानसभा चुनाव में दावेदारी है?
मानवेन्द्र- नहीं,मेरे या मेरे परिवार के किसी सदस्य की दावेदारी नहीं है। पार्टी जो निर्णय लेगी वो सर्वोपरि है।
पत्रिका- एेसा सुना कि चित्रासिंह की सिवाना या पचपदरा से सशक्त दावेदारी है, आप क्या कहेंगे?
मानवेन्द्र- यह सब चुनावी अफवाहें है जो चलती रहती है। चित्रासिंह की जैसलमेर, बेगू, पचपदरा, सिवाना से दावेदारी की बातें आई है लेकिन एेसा कुछ नहीं है।
पत्रिका- आपने स्वाभिमान की लड़ाई लड़ी, क्यों लड़ी और अब कितने स्वाभिमानी कांगे्रस में आएंगे?
मानवेन्द्र- स्वाभिमान का शब्द मेरा नहीं है,यह बाड़मेर-जैसलमेर की जनता का है। भाजपा ने टिकट वितरण को लेकर धोखाधड़ी की उसका लोगों में आक्रोश था। लगातार एेसी घटनाएं हुई। इससे स्वाभिमान शब्द बाड़मेर से प्रदेशभर में फैला। स्वाभिमान रैली में 15 जिलों से लोग आए थे। स्वाभिमानी बड़ी संख्या में कांग्रेस से जुड़ेंगे।
पत्रिका- राजपूत नेता के नाते आप क्या मानते है कितने राजपूत साथ आएंगे?
मानवेन्द्र- कितना प्रतिशत राजपूत जुड़ेंगे यह तो मैं नहीं कह सकता। राजस्थान की बात करें तो अधिक से अधिक राजपूत इसके पक्ष में है। राजपूत के अलावा अन्य समाज भी आएंगे। स्वाभिमान से अनेक समाज जुड़े है।
पत्रिका- राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव को लेकर टास्क या गुरुमंत्र दिया है?
मानवेन्द्र- राहुल गांधी से वर्षों से मित्रता का संबंध रहा है। हमेशा मिलते रहे है और चर्चाएं परिवार व राजनीति की हुई है। विचारधारा एक होने से मिलाप हुआ है। साथ रहकर अब काम करेंगे। गुरुमंत्र कुछ भी नहीं दिया न कोई विशेष टास्क दी है। जो काम देंगे उसको करूंगा।
पत्रिका- जातिगत समीकरणों को कैसे बैठाएंगे और इतने कम समय में?
मानवेन्द्र- मेरी राजनीति छतीसकौम की रही है। इन्हीं को आगे बढाएंगे। समय तो कम है लेकिन सोशल मीडिया से सूचना प्रसारण करंेगे। भावना पहुंचने में समय नहीं लगता। समय की चिंता नहीं है। न कोई समीकरण को लेकर चिंता है। समाज से उठकर द्वेष का बदला लेने का सभी में जज्बा है।
पत्रिका- द्वेष का बदला, मतलब किस प्रकार जवाब देंगे, मूंछ की लड़ाई का?
मानवेन्द्र- बदला मुझे नहीं जनता को लेना है। जनता का आक्रोश उभरकर आना है। 11 दिसंबर को बदले की भावना का भरपूर रिजल्ट सामने होगा।
पत्रिका- टिकट वितरण में आपकी भूमिका या पैरवी रहेगी?
मानवेन्द्र- मेरी पैरवी रहेगी और जरूर रहेगी। जिताऊ उम्मीदवार की बात करेंगे। खुले मन से बात करके पार्टी में जीतने वाले उम्मीदवार को उताने का सभी निर्णय लेंगे।
पत्रिका- क्या जसवंतसिंह को आपके कांगे्रस में जाने के निर्णय की जानकारी है?
मानवेन्द्र- उनकी तबीयत ठीक नहीं है। कांग्रेस ज्वाइन करने से पहले मैने उनसे आशीष ली थी, हालांकि वे कोई उत्तर नहीं दे पाए लेकिन उन्होंने संकेत दिया। वो संकेत मैं समझ गया।
पत्रिका- जसवंतसिंह कद्दावर नेता रहे है, लालकृष्ण आडवाणी, अरूण शौरी, यशवंतसिन्हा सहित उनके कई भाजपा के बड़े नेता उनके मित्र रहे है, उनकी आपके कांग्रेस में जाने पर क्या प्रतिक्रया रही?
मानवेन्द्र- मैंने इन सब लोगों से बात की और अन्य लोगों से भी। सभी ने मुझे शुभकामनाएं दी है। सभी मेरे इस निर्णय से सहमत रहे है।
पत्रिका- अटल बिहारी वाजपेयी के परिवार से आपकी बात हुई?
मानवेन्द्र- हां, अटलजी के परिवार से आशीष के लिए फोन किया। उन्होंने भरपूर आशीर्वाद दिया है । जो पहले प्रेम स्नेह उनका रहा वैसा ही मिला।
Published on:
29 Oct 2018 09:56 pm
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