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रेगिस्तान में वाटर हार्वेस्टिंग का नायाब उदाहरण का अनुकरण शून्य

रेगिस्तान में वाटर हार्वेस्टिंग का नायाब उदाहरण का अनुकरण शून्य
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बाड़मेर

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Ratan Dave

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Updated: 4 Jul 2023, 8:22 PM IST

रेगिस्तान में वाटर हार्वेस्टिंग का नायाब उदाहरण का अनुकरण शून्य

रेगिस्तान में वाटर हार्वेस्टिंग का नायाब उदाहरण का अनुकरण शून्य

बाड़मेर. रामसर का सोनिया चैनल वाटर हार्वेस्टिंग का नायाब उदाहरण है। बरसाती पानी को पहाड़ों से लाकर तालाब तक सहेजना और सालभर तक बेरियों से पानी को पेयजल के लिए सुरक्षित करना। हाल ही में हुई बरसात में कई कस्बे-शहरों में लाखों गैलन पानी फालतू बह गया और कस्बों में पानी के मार्ग अवरूद्ध होनेे से बाढ़ के हालात हुए है। सोनिया चैनल जैसे इंतजाम हों तो रेगिस्तान में बरसाती पानी सालभर तक पीने और खेती के भी काम आने की संभावना है।
2008 में यों बना
2008 में तात्कालीन सरपंच मोतीराम मालू ने रामसर के एक तरफ बने पहाड़ों से बहकर आने वाले वाली के लिए एक करीब दो किमी का चैनल बनाने का प्रस्ताव भेजा, सिर पर बीएडीपी में यह चैैनल बना। इस चैनल से यह पानी इधर-उधर जाने की बजाय सीधा तालाब में आता हैै। तालाब इससे लबालब भर जाता है।
तालाब में बनाई 100 बेरियां
तालाब के भीतर ही 100 बेरियां बना दी। इन बेरियों को तालाब में बनाने से तालाब में जमा होने वाला चैनल का पानी जमीन में उतर जाता है और तालाब का पानी रीतने के बाद इन बेरियों से भूमिगत जल मिल जाता है।
प्रधानमंत्री ने भी सराहा
प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह 2009 में बाड़मेर आए तो उन्होंने यहां सोनिया चैनल पहुंचकर बेरियों को देखा। उन्होंने इसको सराहते हुए इस तरह के वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को डवलप करने की बात कही।
यह है बेरियां
रामसर क्षेत्र रेगिस्तान का इलाका है, जहां पानी की किल्लत रही है। पानी के स्रोत तालाब ही रहे है।गर्मियों में यहां पानी के लिए बेरियां(छोटे कुएं) बने हुए है। धोरों की तलहटी और समतल में ये छोटे कुएं खोदे जाते हैै और भूगर्भ में 100 फीट के करीब ही इसमें पानी मिलता है। यह पानी इतना रहता है कि रात को रिचार्ज और सुबह 50-100 घरों की आपूूर्ति जितना।
पत्रिका ने पुनरूद्धार करवाया
वर्ष 2014 से 2019 तक यह चैनल उपेक्षा का शिकार रहा और इससे पहले भी रेत से अटने लगा था। पत्रिका ने वर्ष 2019 में अभियान चलाया तो 15 बेरियों के पुनरूद्धार को 12 लाख खर्च हुए और इसके बाद पूरे क्षेत्र में 88 लाख के बेरियों के कार्य हुए।
एक्सपर्ट व्यू:रॉल मॉडल नहीं बना पाए
सोनिया चैनल रेगिस्तान में वाटर हार्वेस्टिंग का रॉल मॉडल रहा है लेकिन इसको बना नहीं पाए। मनरेगा व अन्य योजनाओं में जिले के ऐसे स्थलों का चयन कर बरसात के पानी को तालाब, नाडिया, डिग्गियां बनाकर सहेजने और इसे फसलों के लिए काम लिया जा सकता है। पहले बारिश कम होती थी लेकिन अब बारिश भी ज्यादा हो रही है। पहाडिय़ों के इलाके के अलावा पानी की ढलान वाले इलाकों में इस तरह के चैनल बनाए जा सकते है। धोरीमन्ना और चौहटन कस्बों में पहाड़ का पानी शहर में आने से शहर में बाढ़ जैसे हालात हो जाते है। ऐसे ही हालात कई अन्य कस्बों में है। ये पानी फालतू बह जाता है। लाखों गैलन पानी को सहेजने के लिए ये चैनल उपयोगी है। बाड़मेर शहर में सोन तालाब, वैणासर, कारेली नाडी तक चैनल बन सकते हैै। सूजेश्वर की पहाडिय़ों के बीच में भी ऐसे चैनल बनाकर बरसाती पानी सहेजे तो पर्यटन के स्थल बन सकते है।

- यशाोवद्र्धन शर्मा, पूर्व संयोजक इंटेक चेप्टर बाड़मेर